एनएचएआई और वन विभाग की संयुक्त पहल, फूलदार पौधों से तैयार होगा प्राकृतिक आवास; किसानों को भी मिलेगा लाभ
गाजीपुर। गाजीपुर-बलिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे अब सिर्फ तेज रफ्तार का मार्ग नहीं होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल भी बनेगा। 42.5 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे पर 11.5 किलोमीटर लंबा ‘बी कॉरिडोर’ विकसित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना, उनकी घटती आबादी का संरक्षण करना और प्राकृतिक परागण को मजबूत बनाना है।
इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और वन विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों विभाग संयुक्त रूप से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने में जुट गए हैं।
वाराणसी वृत्त के वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह ने बताया कि बी कॉरिडोर के तहत हाईवे के दोनों किनारों और बीच के डिवाइडर पर फूलों और मकरंद से भरपूर विशेष प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। इनमें नीम, करंज, महुआ, पलाश, जामुन और सिरिस जैसे देशी वृक्ष शामिल होंगे, ताकि हर मौसम में मधुमक्खियों को भोजन और सुरक्षित आवास मिल सके।
मधुमक्खियों की भोजन तलाशने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक 500 मीटर से एक किलोमीटर की दूरी पर फूलदार पौधों के समूह विकसित किए जाएंगे। इससे मधुमक्खियां आकर्षित होंगी और अपने प्राकृतिक आवास से दूर नहीं भटकेंगी। वन विभाग के अनुसार अगले छह से सात महीनों में यहां सघन पौधरोपण के बाद बी कॉरिडोर का स्वरूप दिखाई देने लगेगा।
शहरीकरण से घट रही मधुमक्खियों की आबादी
गाजीपुर के प्रभागीय वन अधिकारी अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जंगलों में कमी के कारण मधुमक्खियों की संख्या लगातार घट रही है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और फसलों के परागण पर पड़ रहा है। बी कॉरिडोर विकसित होने से मधुमक्खियों का प्राकृतिक आवास फिर से तैयार होगा, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों का परागण बेहतर होगा और किसानों की पैदावार बढ़ने की उम्मीद है।
अधिकारी बोले
वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह ने कहा कि 11.5 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में अगले छह से सात महीनों के भीतर सघन पौधरोपण कर इसे पूरी तरह कार्यात्मक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मधुमक्खियां हमारी खाद्य श्रृंखला और प्राकृतिक परागण की रीढ़ हैं। राजमार्गों के किनारे ऐसे हरित गलियारों का विकास बिना अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण के पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
