हीमोफीलिया का समय पर निदान और उपचार बचा सकता है जिंदगी व दिव्यांगता से: प्रो. डॉ. मनोज

ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की खोज कर उपचार से जोड़ने पर जोर, चिकित्सकों की बैठक में हीमोफीलिया जागरूकता पर मंथन

वाराणसी (काशीवार्ता)। हीमोफीलिया सोसायटी की ओर से कंप्रिहेंसिव हीमोफीलिया अवेयरनेस एवं एडवांस ट्रीटमेंट विषय पर चिकित्सकों की बैठक मलदहिया स्थित एक होटल में हुई। बैठक में बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने हिस्सा लेकर हीमोफीलिया के मरीजों की पहचान, उपचार और जागरूकता को लेकर चर्चा की। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.पी. सिंह ने कहा कि हीमोफीलिया गंभीर और आनुवांशिक बीमारी है। इसके मरीजों की पहचान के लिए पूरे जनपद में सार्थक प्रयास किए जाएंगे। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की खोज और पहचान कर उन्हें चिह्नित किया जाएगा, ताकि समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि बीमारी की जानकारी के अभाव में मरीज इधर-उधर भटकते रहते हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने से दिव्यांगता का शिकार हो जाते हैं। जागरूकता और समय पर उपचार से उनकी जान बचाने के साथ ही उन्हें दिव्यांग होने से भी बचाया जा सकता है।।इस अवसर पर प्रो. डॉ.एम.के.श्रीवास्तव ने हीमोफीलिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने उपचार में उपयोग होने वाले इंजेक्शन तथा मरीजों के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. आलोक, डॉ. संदीप, डॉ. दीपक और डॉ. पवन ने कहा कि हीमोफीलिया के प्रति अभी भी व्यापक स्तर पर जागरूकता की कमी है। पूर्वांचल में हीमोफीलिया सोसायटी मरीजों की खोज कर उन्हें चिकित्सा सुविधा से जोड़ने का कार्य कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि हीमोफीलिया केयर सेंटर ‘आशादीप’ बनाया गया है, जहां करीब 1200 मरीज पंजीकृत हैं। बैठक का उद्देश्य चिकित्सकों के बीच बीमारी की पहचान और आधुनिक उपचार को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा।।कार्यक्रम में डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, डॉ. सी.पी. सिंह, डॉ. विशाल सिंह यादव, डॉ. रितु गर्ग, डॉ. संजय गर्ग, डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. अतुल सिंह, डॉ.आमीर सम्स, डॉ.पंकज सिंह, विवेक सूद, डॉ.प्रियांस गर्ग, डॉ.निशा गर्ग, डॉ.पी.पी.उपाध्याय सहित अनेक चिकित्सक उपस्थित रहे। संचालन संदीप पांडेय ने व धन्यवाद ज्ञापन ओ.पी. पाण्डेय ने किया।

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