
लखनऊ, 7 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के बुनकरों और कारीगरों के उत्थान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हथकरघा और पावरलूम उद्योग करीब 30 लाख लोगों की आजीविका का आधार बन चुका है। सरकार ने पिछले वर्ष 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को बिजली सुविधा के लिए 109 करोड़ रुपये का लाभ दिया, जबकि डिजाइन, तकनीक, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए यूपी के हस्तशिल्प उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का अभियान तेज किया गया है।
लोकभवन सभागार में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस-2026 एवं संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों को सम्मानित किया और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता राशि के चेक वितरित किए। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा प्रमुख खरीदारों के साथ हुए एमओयू का भी साक्षी बने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, मऊ, आजमगढ़, भदोही, मिर्जापुर, बाराबंकी, अंबेडकर नगर और संत कबीर नगर जैसे जिले अपने उत्कृष्ट हस्तशिल्प और बुनकरी के लिए पूरी दुनिया में पहचान बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि समय की मांग के अनुसार नए डिजाइन और आधुनिक तकनीक अपनाकर ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहा जा सकता है।
सीएम योगी ने बताया कि कभी संकट में पड़ा भदोही का कालीन उद्योग आज फिर दुनिया के बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। देश की नई संसद भवन में भी भदोही की कालीन बिछाई गई है, जो उत्तर प्रदेश के कारीगरों की प्रतिभा और गुणवत्ता का सम्मान है। वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर और भदोही में एक्सपो सेंटर के माध्यम से बुनकरों को नई तकनीक, डिजाइन और निर्यात के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाई देने के लिए लखनऊ में 1000 एकड़ में पीएम मित्र पार्क विकसित किया जा रहा है। साथ ही संत कबीर के नाम पर प्रदेश के पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि वाराणसी के फैसिलिटेशन सेंटर से जुड़े छात्रों को डिजाइन और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हथकरघा उद्योग में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्य कर रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विदेशी दौरों पर उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प उत्पाद विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप भेंट करते हैं, जिससे प्रदेश के कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
उन्होंने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराया है। प्रदेश में वर्तमान में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं और हथकरघा अब सबसे बड़े कुटीर उद्योग के रूप में उभर रहा है। सरकार विश्वकर्मा श्रम सम्मान और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट भी उपलब्ध करा रही है।
सीएम योगी ने सरकारी विभागों, अस्पतालों, होटलों और गेस्ट हाउसों में हथकरघा उत्पादों की खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि दीपावली, होली, ईद और अन्य अवसरों पर स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को उपहार के रूप में अपनाएं, ताकि स्वदेशी को बढ़ावा मिले और बुनकरों की आय में वृद्धि हो।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अगस्त 1905 का स्वदेशी आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। महात्मा गांधी ने खादी और चरखे को आजादी का प्रतीक बनाया था और उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, जो देशभर के लाखों बुनकरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान का प्रतीक है।
