
वाराणसी। सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला हरितालिका तीज व्रत आज श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सुखी दांपत्य जीवन, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। तीज व्रत को माता पार्वती की कठोर तपस्या और अटूट श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी साधना और संकल्प को नहीं छोड़ा। माता पार्वती की तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी पौराणिक प्रसंग की स्मृति में महिलाएं तीज का व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की आराधना करती हैं।
तीज व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करती हैं। इस दौरान तीज माता की कथा सुनने और शिव-पार्वती की उपासना करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ व्रत और पूजन करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की कामना पूरी होती है।
इस बार तीज और गणेश चौथ का संयोग भी धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र तथा प्रथम पूज्य देव हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा कर विघ्न-बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।
तीज और गणेश चौथ के इस विशेष अवसर पर शिव-पार्वती और गणेश जी की आराधना से घर-परिवार में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालु सुख, समृद्धि, सौभाग्य और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
