सफर में मिली जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी, अलीगढ़ जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर गूंजी नवजात की किलकारी

अलीगढ़ चार दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद जब डॉक्टरों ने घर लौटने की सलाह दी तो परिवार मायूस मन से ट्रेन में सवार हो गया। लेकिन किस्मत ने नवजात बच्ची के जन्म के लिए अस्पताल नहीं, बल्कि अलीगढ़ जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 को चुना। मंगलवार दोपहर कुछ ही मिनटों में रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म अस्थायी प्रसूति कक्ष में बदल गया, जहां आरपीएफ और जीआरपी की महिला कर्मियों की मदद से एक महिला ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

घटना मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे की है। जनपद औरैया के गहेसर गांव निवासी धर्मेंद्र अपनी गर्भवती पत्नी कामिनी देवी को नई दिल्ली से गोमती एक्सप्रेस (12420) से घर लेकर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक कामिनी को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। जैसे ही ट्रेन अलीगढ़ जंक्शन पहुंची, धर्मेंद्र मदद के लिए तुरंत रेलवे कर्मियों के पास पहुंचे।

सूचना मिलते ही आरपीएफ के उपनिरीक्षक धीरज चौधरी, महिला कांस्टेबल कुसुम देवी और चांदनी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना देर किए प्लेटफॉर्म पर साड़ी और अन्य कपड़ों की मदद से घेरा बनाकर महिला की निजता का ध्यान रखा। इस दौरान वहां मौजूद महिला यात्रियों ने भी आगे बढ़कर सहयोग किया। कुछ ही देर बाद कामिनी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

नवजात की पहली किलकारी सुनते ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों के चेहरे पर खुशी और राहत दिखाई दी। कई यात्रियों ने तालियां बजाकर आरपीएफ महिला कर्मियों और मदद करने वाली महिलाओं का उत्साह बढ़ाया। इसके बाद एंबुलेंस की व्यवस्था कर जच्चा और बच्ची को मोहनलाल गौतम महिला अस्पताल भेजा गया, जहां दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं।

चार दिन अस्पताल में भर्ती थीं कामिनी, सफर में मिली बेटी की खुशी
धर्मेंद्र ने बताया कि कामिनी दिल्ली के ओखला स्थित एक अस्पताल में चार दिन से भर्ती थीं। परिवार सामान्य प्रसव का इंतजार कर रहा था, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी प्रसव नहीं हुआ। डॉक्टरों ने सामान्य डिलीवरी की संभावना कम बताते हुए उन्हें घर ले जाने की सलाह दी थी। इसके बाद दोनों गोमती एक्सप्रेस से औरैया लौट रहे थे।

परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी का जन्म ट्रेन के सफर के दौरान अलीगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर होगा। यह घटना वहां मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मियों के लिए भी एक भावुक और यादगार पल बन गई।

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