काशी में पर्यटन का मेगा ब्लूप्रिंट! 109 करोड़ की 36 परियोजनाओं से बदलेगी वाराणसी मंडल की तस्वीर, घाटों से मंदिरों तक होगा भव्य कायाकल्प

वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी मंडल को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का और बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को कमिश्नर सभागार में हुई समीक्षा बैठक में लगभग 109.20 करोड़ रुपये की लागत वाली 36 पर्यटन परियोजनाओं पर विस्तृत मंथन किया गया। इन परियोजनाओं के जरिए वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और चंदौली के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का विकास कर पर्यटन को नई रफ्तार देने की तैयारी है।

बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमित अभिजात ने प्रस्तावित और निर्माणाधीन योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि पर्यटन विकास के दौरान स्थानीय संस्कृति और विरासत को संरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

सबसे अधिक 22 परियोजनाएं वाराणसी के लिए प्रस्तावित की गई हैं। इसके अलावा जौनपुर में 6, गाजीपुर में 5 और चंदौली में 3 परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण, आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

वाराणसी की प्रमुख परियोजनाओं में कैंट क्षेत्र के सती माई मंदिर, प्राचीन रामबाग मंदिर, रोहनिया के प्राचीन शिवधाम मंदिर, पिंडरा के पौहारी बाबा मंदिर, निर्माण दास बाबा कुटी और भगवान राम-जानकी महावीर मंदिर का विकास शामिल है। इसके अलावा शिवपुर के सराय मोहनाघाट पर लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी घाट का निर्माण, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में करीब 17 करोड़ रुपये से एक हजार क्षमता वाले ऑडिटोरियम का निर्माण, ‘परंपरा केंद्र’ का विकास तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधुनिक साइनेज लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया।

गाजीपुर में बूढ़े महादेव मंदिर, हनुमान चौतरा और हथियाराम मठ, चंदौली में विश्वकर्मा मंदिर, दुखहरण महादेव बाबा मंदिर और काली माता मंदिर, जबकि जौनपुर में गोमतेश्वर महादेव धाम, मां वैष्णो देवी धाम और राधा-कृष्ण मंदिर समेत छह धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में संस्कृति विभाग की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई। इनमें बत्तीस खंभा, गुरुधाम मंदिर और पंचो शिवाला के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के प्रस्ताव शामिल हैं, ताकि वाराणसी मंडल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित कर पर्यटन से जोड़ा जा सके।

निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान रोहनिया में लगभग 24.63 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले संत रविदास संग्रहालय, 5.21 करोड़ रुपये की लागत वाले मुंशी प्रेमचंद स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय तथा गाजीपुर स्थित शहीद वीर अब्दुल हमीद स्मारक के विकास कार्यों की प्रगति का भी आकलन किया गया। मुंशी प्रेमचंद संग्रहालय परियोजना फिलहाल टेंडर प्रक्रिया में है।

धर्मार्थ कार्य विभाग की योजनाओं में जौनपुर के बड़े हनुमान मंदिर का सौंदर्यीकरण, वाराणसी के भिंगराज अनाथालय परिसर में लगभग 24.04 करोड़ रुपये की लागत से नए अनाथालय का निर्माण तथा दंडी सेवाश्रम परिसर में करीब 23.41 करोड़ रुपये से सेवाश्रम विकास परियोजना भी शामिल है।

बैठक में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पिंडरा क्षेत्र के करखियां गांव की झील को लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से इको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। इस परियोजना के तहत झील के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

बैठक के अंत में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने निर्देश दिए कि एक करोड़ रुपये तक की सभी स्वीकृत निर्माणाधीन परियोजनाओं को नवंबर माह तक हर हाल में पूरा किया जाए। वहीं अपर मुख्य सचिव अमित अभिजात ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के सभी 18 मंडलों में पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ विभाग की परियोजनाओं की लगातार समीक्षा कर विरासत आधारित पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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