यूं ही नहीं बिगड़े जेन जी के बोल, ओटीटी प्लेटफार्म पर तो आइए….

त्वरित टिप्पणीसुनिल कुमार सिंह

मिर्जापुर, रक्तांचल जैसी फिल्मों ने बिगाड़ा युवाओं कि भाषा शैली
सरकार को
लगाना होगा अंकुश

जंतर मंतर पर पिछले दिनों जो कुछ भी हुआ वह वाकई बहुत दुखद था। अब इसे बच्चों पर लाठीचार्ज के लिए ग़लत कहा जाए चाहे जेन जी की भाषा शैली को लेकर। हालाँकि, देश में इस पर एक बहस छिड़ गई है। जिसमें सरकार और विपक्ष भी शामिल हो गए हैं। कोई जेन जी की भाषा को अमर्यादित बता रहा है तो कोई कह रहा ये उनके मन की अभिव्यक्ति थी। जो सड़क पर आ गई। इन सब के बीच कोई इस बात पर बात नहीं कर रहा कि आखिरकार, जेन जी के बोल इतने कैसे बिगड़े। क्या इन्हें इनके अभिभावक ठीक से संस्कार नहीं दे पाए या इन्हें चाहिए नहीं। ऐसे कई अनसुलझे सवाल देश के लाखो-करोड़ो माँ बाप के मन में कौंध रहे हैं। यहाँ पर ये बताना अत्यंत जरूरी है कि हाल के वर्षों में एक ओटीटी नामक प्लेटफॉर्म हमारे आपके घर में प्रवेश कर गया। दबे पाँव आया और बच्चों को ह्लमाँ-बहनह्व करना सिखा गया। आपको बता दें इसका सबसे अधिक प्रसार कोविड काल में हुआ। जब लोग सिनेमाहाल जाने से परहेज करने लगे थे। घर बैठे इससे अच्छा मनोरंजन का जेन जी को दूसरा कोई साधन नहीं समझ आया। बस यही चूक हो गई अभिभावकों से। हालाँकि, इस पर हमारी सरकार को भी संज्ञान लेना चाहिए था। मजे की बात तो यह है कि जब सिनेमा घरों में फ़िल्में पिटने लगी तो फ़िल्म स्टार भी इसी प्लेटफॉर्म पर आ गए। वो ऐसे ऐसे स्टार जिन्हें युवा अपना आदर्श मान चुके थे।

खैर, इस प्लेटफार्म ने हमारी अगली पीढ़ी का सत्यानाश कर दिया। दरअसल, हमने जब इस प्लेटफार्म पर जाकर देखा तो पता चला कि इसके ज़रिए समाज में क्या परोसा जा रहा है। मिर्जापुर और रक्तांचल जैसी फ़िल्में इसका ताजा उदाहरण हैं। इसके अलावा भी शायद ही कोई फ़िल्म ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ हुई होगी जिसमें ह्लनानवेज भाषाह्व का इस्तेमाल न किया गया हो। एक बात विचारणीय है, क्या इसके लिए कोई सेंसर नहीं है। क्या इन्हें समाज का कबाड़ा करने की पूरी छूट है ? यदि ऐसा है तो फिर जेन जी को दोष देना बंद होना चाहिए। उनकी इसमें कोई गलती नहीं।हमने उन्हें जो दिया आज वो हमे भी वही दे रहे हैं। शायद प्रकृति का यही नियम है। हमे, आपको और हमारी सरकार को इस विषय पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। वरना, अभी देश जेन जी को लेकर परेशान है आने वाले दिनों में अल्फ़ा को झेलना इससे भी ज्यादा मुश्किल होगा। इसलिए समय रहते संभल जाना चाहिए। तभी देश का भविष्य सुरक्षित और उज्जवल हो सकता है।

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