
वाराणसी। भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर देशभर में हर्ष की लहर है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी ने इसे भारत और पूरे विश्व के लिए गर्व का क्षण बताया।
उन्होंने कहा कि 2605वें धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस के आयोजन से पहले सारनाथ को यह वैश्विक सम्मान मिलना अत्यंत ऐतिहासिक और प्रेरणादायक है। सारनाथ वह पावन स्थल है, जहां तथागत बुद्ध ने धर्मचक्र प्रवर्तन कर पूरी मानवता को करुणा, शांति और ज्ञान का संदेश दिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी उल्लेख किया कि भारत ने दुनिया को “बुद्ध” दिया है, “युद्ध” नहीं, और कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में यह संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
प्रो. नेगी ने इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल के प्रयासों और नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने सभी बौद्ध अनुयायियों और देशवासियों को बधाई देते हुए कामना की कि भगवान बुद्ध का मार्ग समस्त मानवता को सदैव शांति, सद्भाव और करुणा का प्रकाश देता रहे।
