गुरु पूर्णिमा पर योगी ने टेका बाबा विश्वनाथ के दरबार में माथा, काल भैरव से लिया आशीर्वाद, सावन को लेकर दिए सख्त निर्देश

वाराणसी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने काशी पहुंचकर बाबा काल भैरव और श्री काशी विश्वनाथ के दरबार में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेश और देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं लोक कल्याण की कामना करते हुए श्रावण मास में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

मुख्यमंत्री सबसे पहले काशी के कोतवाल माने जाने वाले बाबा काल भैरव मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पूरे वैदिक विधान के साथ पूजा-अर्चना और आरती कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जबकि मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन स्वीकार किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने गर्भगृह में प्रवेश कर षोडशोपचार विधि से बाबा विश्वनाथ का पूजन किया। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री के दर्शन के दौरान पूरा धाम “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया।

श्रावण मास की पूर्व संध्या पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दर्शन-पूजन के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में अधिकारियों के साथ समीक्षा भी की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सावन के दौरान बाबा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सुगम दर्शन, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया, ताकि हर श्रद्धालु को सहज और व्यवस्थित दर्शन का लाभ मिल सके।

दर्शन-पूजन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक आत्मीय रूप भी देखने को मिला। उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद बच्चों को चॉकलेट वितरित की, उन्हें स्नेहपूर्वक दुलार किया और उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री के इस स्नेहिल व्यवहार से बच्चे और उनके परिजन काफी उत्साहित दिखाई दिए।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा सांसद तरुण चुग, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। गुरु पूर्णिमा और श्रावण मास के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री का यह धार्मिक दौरा श्रद्धा, आस्था और जनकल्याण के संदेश के रूप में देखा गया।

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