काशी को मिली विकास की बड़ी सौगात: पीएम ने 6,332 करोड़ की 163 परियोजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास

वाराणसी। प्रधानमंत्री ने अपने दो दिवसीय काशी दौरे के दौरान शहर और पूर्वांचल को विकास की बड़ी सौगात दी। कुल 6,332.08 करोड़ रुपये की लागत वाली 163 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया, जिनका उद्देश्य बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, पर्यटन और शहरी सुविधाओं को मजबूत करना है।

इसमें 1,054.69 करोड़ रुपये की लागत से बनी 50 परियोजनाओं का लोकार्पण और 5,277.39 करोड़ रुपये की 113 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।

प्रमुख परियोजनाएं

  • सिग्नेचर ब्रिज (रेलवे रोड ब्रिज): करीब 2,464.46 करोड़ रुपये की लागत से मालवीय पुल के पास बनने वाले इस बड़े प्रोजेक्ट की नींव रखी गई।
  • सीवरेज और जल आपूर्ति परियोजनाएं: शहरी क्षेत्र में 1,582.99 करोड़ रुपये की योजनाओं की शुरुआत।
  • कबीरचौरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल: लगभग 429.36 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र।
  • कज्जाकपुरा आरओबी: 144.43 करोड़ रुपये की लागत से बना रेल ओवरब्रिज जनता को समर्पित।
  • एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट): नमामि गंगे के तहत 308.09 करोड़ रुपये की परियोजना का लोकार्पण।

पर्यटन और घाटों का विकास

गंगा किनारे के घाटों के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाओं की शुरुआत की गई।

  • दशाश्वमेध घाट और आसपास के प्रमुख घाटों का जीर्णोद्धार
  • घाटों से मंदिर तक पहुंच को बेहतर बनाने के प्रयास
  • पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार

सड़क और ग्रामीण विकास

वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में सड़कों का चौड़ीकरण, नए संपर्क मार्ग और ग्रामीण सड़कों का निर्माण भी इन योजनाओं का बड़ा हिस्सा है। इससे स्थानीय आवागमन और कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं

  • स्कूलों में स्मार्ट क्लास और मरम्मत कार्य
  • स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का विस्तार
  • खेल सुविधाओं और हॉस्टल का निर्माण
  • पेयजल, सीवर और बिजली आपूर्ति से जुड़ी योजनाएं

विकास को नई दिशा

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं न सिर्फ काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेंगी, बल्कि शहर को आधुनिक सुविधाओं से भी जोड़ेंगी। इससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

यह दौरा काशी के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे शहर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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