सावन में काशी आएं तो इन प्रमुख शिवालयों में जरूर करें दर्शन

वाराणसी। भगवान शिव की नगरी काशी में सावन मास का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस पवित्र महीने में काशी के शिवालयों में विधि-विधान से पूजा और जलाभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु सावन में काशी पहुंचते हैं और विभिन्न प्राचीन शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं।

सबसे पहले श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करते हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल यह मंदिर सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां मंगला आरती, रुद्राभिषेक और विशेष श्रृंगार के दर्शन का अलग ही महत्व माना जाता है।

इसके बाद मृत्युंजय महादेव मंदिर का दर्शन किया जाता है। मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। मंदिर परिसर का पवित्र कुआं भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

काशी के प्राचीनतम शिवालयों में शामिल तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग प्रत्येक वर्ष तिल के समान आकार में बढ़ता है। सावन में इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।

शहर से कुछ दूरी पर स्थित मार्कण्डेय महादेव मंदिर भी अत्यंत प्रसिद्ध है। पौराणिक कथा के अनुसार यहीं भगवान शिव ने बालक मार्कण्डेय की रक्षा कर उन्हें अमरत्व का वरदान दिया था। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां विशाल मेले जैसा वातावरण रहता है।

इसके अलावा श्रद्धालु कालभैरव मंदिर में दर्शन कर काशी के कोतवाल का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ की यात्रा कालभैरव के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है।

सावन में काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन प्रमुख शिवालयों का दर्शन आध्यात्मिक अनुभव के साथ आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम बन जाता है। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरी काशी शिवमय हो उठती है।

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