
वाराणसी। देश आजादी के 79 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है, लेकिन वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय खुशीपुर (रोहनिया) की तस्वीरें सरकारी दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। जिला मुख्यालय (डीएम कार्यालय) से महज 17 किलोमीटर दूर स्थित इस विद्यालय में हल्की बारिश के बाद ही पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है।

मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर शौचालय तक जलभराव होने से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का विद्यालय में प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है। हालात ऐसे हैं कि मासूम बच्चों को गंदे पानी से बचने के लिए ईंटों पर संतुलन बनाते हुए स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। यह दृश्य शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विद्यालय परिसर में लंबे समय तक पानी भरे रहने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है, जिससे अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या वर्षों पुरानी है। हर बारिश में विद्यालय की यही स्थिति होती है, लेकिन जल निकासी की स्थायी व्यवस्था आज तक नहीं की गई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय से महज 17 किलोमीटर दूर स्थित सरकारी विद्यालय का यह हाल है, तो दूरदराज के ग्रामीण स्कूलों की स्थिति कैसी होगी। अब ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था, विद्यालय परिसर को सुरक्षित बनाने और बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है।
