गंगा की लहरों पर दौड़ी ‘ग्रीन’ नावें, काशी में इलेक्ट्रिक बोट सेवा का शुभारंभ

वाराणसी। काशी में गंगा की लहरों पर अब हरित और आधुनिक जल परिवहन की शुरुआत हो गई है। नमो घाट से गुरुवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी ने पांच इलेक्ट्रिक यात्री नौकाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) और गेल (इंडिया) लिमिटेड की संयुक्त पहल के तहत शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य गंगा को ध्वनि और वायु प्रदूषण से मुक्त बनाते हुए स्वच्छ जल परिवहन को बढ़ावा देना है।

महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हरित एवं सतत विकास के विजन को साकार करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक नौकाओं की संचालन लागत पारंपरिक डीजल नौकाओं की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत तक कम होगी। इससे नाविकों की आय बढ़ेगी और पर्यटकों को बिना धुएं और शोर के शांत व सुरक्षित नौकायन का अनुभव मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान अपनी पारंपरिक नावों को इलेक्ट्रिक सिस्टम में परिवर्तित कराने वाले पांच नाविकों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। नाविकों ने कहा कि इस पहल से डीजल पर होने वाला खर्च बचेगा, आमदनी बढ़ेगी और मां गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने में भी मदद मिलेगी।

वीडीए के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बताया कि पहले चरण में कुल 20 यात्री नौकाओं को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक प्रणाली से लैस किया जाएगा। पायलट परियोजना सफल रहने पर इसे बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा, जिससे वाराणसी देश के अन्य नदी शहरों के लिए स्वच्छ जल परिवहन का मॉडल बन सके।

समारोह के बाद जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नाविकों ने नमो घाट से भदैनी घाट तक इलेक्ट्रिक नौका से जल भ्रमण कर नई तकनीक का अनुभव लिया।

आयरा इलेक्ट्रिक के सीईओ गगन कुमार मेहता ने बताया कि प्रत्येक नौका में 15 किलोवाट की इलेक्ट्रिक आउटबोर्ड मोटर, 20 kWh क्षमता का लिथियम बैटरी पैक, डिजिटल डिस्प्ले, जीपीएस ट्रैकिंग, रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम और ईवी चार्जिंग सुविधा दी गई है। एक बार चार्ज होने पर नौका अस्सी घाट से नमो घाट के बीच कम से कम तीन राउंड ट्रिप आसानी से पूरी कर सकती है। घाटों पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया गया है।

TOP

You cannot copy content of this page