
हरिद्वार। सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार मोदीनगर निवासी दंपति आशा और सचिन अपनी अनोखी शिवभक्ति और अटूट प्रेम के कारण श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण सचिन चलने में असमर्थ हैं, लेकिन भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक की उनकी इच्छा को पूरा करने के लिए उनकी पत्नी आशा ने ऐसा संकल्प लिया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
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आशा ने अपने दिव्यांग पति सचिन को कंधों पर बैठाकर करीब 180 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की और हरिद्वार पहुंचीं। वहां हरकी पैड़ी से गंगाजल भरने के बाद दोनों ने दक्षेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
यह कोई पहली बार नहीं है। यह दंपति लगातार दूसरे वर्ष भी इसी तरह कठिन कांवड़ यात्रा पूरी कर रहा है। रास्ते भर श्रद्धालु उनकी आस्था, समर्पण और प्रेम को देखकर उन्हें नमन करते रहे। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे प्रेम, त्याग और शिवभक्ति की अद्भुत मिसाल बता रहे हैं।
आशा और सचिन की यह यात्रा साबित करती है कि जब विश्वास अटूट हो और साथ निभाने का संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी कठिनाई इंसान के हौसले को नहीं रोक सकती।
