आलोक कुमार श्रीवास्तव
डीडीयू अस्पताल की चिकित्सक कॉलोनी बीमारी के मुहाने पर, दुर्गंध और मच्छरों के बीच रहने को मजबूर डॉक्टर-कर्मचारी
वाराणसी (काशीवार्ता)। मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वच्छता और साफ-सफाई की नसीहत देने वाला पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल इन दिनों अपने ही चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। अस्पताल से सटी चिकित्सक कॉलोनी में करीब 10 दिनों से सड़क और घरों के सामने मल-मूत्रयुक्त गंदा पानी जमा है। दुर्गंध, सड़ांध और मच्छरों के बीच चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और उनके परिवार रहने को मजबूर हैं।
जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने के कारण बारिश थमने के बाद भी गंदा पानी निकल नहीं पा रहा है। जगह-जगह जमा दूषित पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे डायरिया, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अस्पताल में रोज मरीजों का इलाज करने वाले चिकित्सक खुद संक्रमण के खतरे के बीच रहने को विवश हैं।
वेतन से किराया कट रहा, सुविधाएं नदारद
कॉलोनी में रहने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी आवास का किराया उनके वेतन से नियमित रूप से काटा जा रहा है, लेकिन आवासीय परिसर की मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। कई स्थानों पर सड़कें और भवन भी जर्जर हालत में हैं, जिससे किसी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
दुर्गंध और मच्छरों के बीच परिवारों की मुश्किल बढ़ी
दूषित पानी की तेज दुर्गंध और मच्छरों के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। कॉलोनी में बच्चों और बुजुर्गों के रहने से परिवारों की चिंता और बढ़ गई है। कर्मचारियों के मुताबिक जलभराव के कारण सांप समेत अन्य जीव-जंतुओं के घरों में घुसने का खतरा भी बना हुआ है।
शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं
चिकित्सकों और कर्मचारियों का आरोप है कि नगर निगम और विभागीय अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि बारिश के बाद भी कई दिनों तक मल-मूत्रयुक्त पानी के बीच परिवारों को रहने के लिए मजबूर होना जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्य गेट पर सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों में
कॉलोनी की समस्याएं केवल जलभराव तक सीमित नहीं हैं। कर्मचारियों के अनुसार आवासों में अनाधिकृत लोगों के रहने की शिकायतें भी हैं। मुख्य गेट के आसपास कथित तौर पर जुआरियों और शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
