प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले माफियाओं से सजग रहें, जल संरक्षण को बनाएं जीवन का हिस्सा: मुख्यमंत्री योगी

विश्व पर्यावरण दिवस पर सीएम योगी ने दिलाए पांच संकल्प, जुलाई में एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य

लखनऊ, 5 जून। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से प्रकृति, जलस्रोतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया तथा तस्करों के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मातृभूमि और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को पांच महत्वपूर्ण संकल्प भी दिलाए।

शुक्रवार को लखनऊ स्थित में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ विषयक संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही यह अभियान सफल हो सकता है।

प्रदेशवासियों को दिलाए पांच संकल्प

मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे:

  • एक पेड़ अपनी मां के नाम अवश्य लगाएं।
  • लगाए गए पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
  • जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग बंद करें।
  • प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाएं।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पानी की टोंटी चोरी कर रहा हो या पानी व्यर्थ बहा रहा हो तो समाज को ऐसे लोगों को टोकना चाहिए। जल संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

जल है तो कल है, वन है तो जीवन है

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल और वन मानव जीवन के मूल आधार हैं। उन्होंने चिंता जताई कि पिछले 25 वर्षों में मौसम चक्र में लगभग एक से डेढ़ महीने का बदलाव आया है, जिसका सबसे अधिक असर कृषि और किसानों पर पड़ रहा है। अतिवृष्टि, अनावृष्टि और असमय आने वाली प्राकृतिक आपदाएं जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी हैं।

मां और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य निभाने का समय

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भगवान के प्रसिद्ध कथन “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस धरती ने हमें जन्म दिया, उसके प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का भाव प्रत्येक नागरिक में होना चाहिए।

भारतीय परंपरा में प्रकृति संरक्षण का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पशु-पक्षियों और प्रकृति के साथ गहरा संबंध स्थापित किया गया है। भगवान के साथ नंदी और सर्प, भगवान के साथ मूषक तथा मां भगवती के साथ सिंह का संबंध इस बात का प्रतीक है कि मानव और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं।

कुकरैल और लखनऊ के तापमान में दिखता है अंतर

मुख्यमंत्री ने कहा कि संरक्षित वन क्षेत्रों का पर्यावरण पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब लखनऊ का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस होता है, तब क्षेत्र में तापमान लगभग 40 डिग्री या उससे कम महसूस होता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के निकट रहना आरोग्य और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है।

जुलाई में एक दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में वन विभाग की नर्सरियों में मात्र 5 लाख पौधे उपलब्ध थे, जबकि आज सरकारी और निजी नर्सरियों में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रदेशभर में 5 करोड़ पौधे लगाए जा रहे हैं और जुलाई में एक दिन के विशेष महाअभियान के दौरान 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री ने ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जैव विविधता के क्षरण और जल संकट को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा कि वातावरण में बढ़ती ग्रीनहाउस गैसें और प्रदूषणकारी कण मानव स्वास्थ्य और वर्षा चक्र दोनों को प्रभावित कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कहीं सूखा और कहीं बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं।

यूपी जल संसाधनों के मामले में समृद्ध

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे समृद्ध जल संसाधन वाले राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2017 तक केवल एक रामसर साइट थी, जबकि आज इसकी संख्या बढ़कर 13 हो चुकी है। हाल ही में बलिया स्थित को प्रदेश की 13वीं रामसर साइट का दर्जा मिला है।

रामगढ़ताल और चिलुआताल संरक्षण का उदाहरण

मुख्यमंत्री ने बताया कि गोरखपुर में लगभग 1400 एकड़ क्षेत्र में फैले तथा 400-500 एकड़ क्षेत्र वाले का संरक्षण किया गया है। इन प्राकृतिक जलाशयों ने पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

तालाब, पोखर और कुओं के संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रधानों, नगर निकाय अध्यक्षों और महापौरों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्रों के तालाबों, पोखरों, कुओं और बावड़ियों को संरक्षित एवं पुनर्जीवित करें। उन्होंने कहा कि ये पारंपरिक जलस्रोत भविष्य में जल संकट से बचाने का आधार बनेंगे।

विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में सबसे अधिक एक्सप्रेसवे, फोरलेन और सिक्सलेन सड़कें बनी हैं तथा बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना विकसित हुई है। इसके बावजूद प्रदेश ने वन क्षेत्र बढ़ाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

कार्यक्रम में वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) , वन राज्यमंत्री सहित वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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