सारनाथ, वाराणसी। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (CIHTS ), सारनाथ और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महासंघ (IBC), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आज संस्थान के सोवा रिग्पा भवन स्थित ‘जीवक प्रेक्षागृह’ में ‘आषाढ़ पूर्णिमा धम्मचक्क पवत्तन दिवस’ का गरिमामय आयोजन किया गया। यह ऐतिहासिक दिवस भगवान बुद्ध द्वारा सारनाथ के मृगदाव (हिरण पार्क) में दिए गए उनके प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन सूत्र) की स्मृति में मनाया गया।मुख्य बिंदु:मुख्य अतिथि का संबोधन: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी बौद्ध स्थलों के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है। उन्होंने रेखांकित किया कि केंद्र सरकार भी देश भर में प्राचीन बौद्ध स्थलों के विकास, आवागमन और पर्यटक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।स्वागत वक्तव्य: अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महासंघ (IBC) के महासचिव शार्त्से खेनसुर जंगचुप चोएडेन रिंपोछे ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।मुख्य वक्ता का व्याख्यान: भारत-श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष वेन डॉ. कहावत्ते सिरी सुमेधा थेरो ने उत्तर प्रदेश में विभिन्न बौद्ध स्थलों के महत्व, वर्तमान विकास कार्यों और वैश्विक स्तर पर बौद्ध धर्म की बढ़ती स्वीकार्यता पर प्रकाश डाला।अध्यक्षीय उद्बोधन:CIHTS के कुलपति प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी ने ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ Paticchasamuppada) के विशेष संदर्भ में इस पावन दिवस के महत्व को समझाया।सांस्कृतिक प्रस्तुति: संस्थान के छात्रों द्वारा प्रथम धर्म चक्र प्रवर्तन और चार आर्य सत्यों पर आधारित एक प्रभावशाली एकांकी नाटक का मंचन किया गया।धन्यवाद ज्ञापन व संचालन: कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री वैशाली द्वारा किया गया, तथा अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महासंघ (IBC ) के महानिदेशक श्री राघव प्रसाद भटनागर ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।समारोह में संस्थान के सभी संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शोधार्थी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएँ और IBC के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
सारनाथ में धम्मचक्क पवत्तन दिवस की धूम, CIHTS में हुआ भव्य समारोह
