वाराणसी में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बैंक कर्मचारियों की सूझबूझ से एक रिटायर्ड प्रधानाचार्य को 10 लाख रुपये के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से बचा लिया गया। लंका क्षेत्र के बालाजी नगर निवासी शंकर सिंह यादव को साइबर अपराधियों ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस अधिकारी बताकर झांसे में लिया और उन पर गंभीर आरोप लगाकर डराया।
ठगों ने दावा किया कि उनके आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाता खोला गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध गतिविधियां हो रही हैं। इसके बाद वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी की वर्दी में एक व्यक्ति ने उनसे बात की और मामले को दबाने के नाम पर पैसे की मांग की। शुरुआत में उनसे अलग-अलग खातों से करीब 3 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
इसके बाद ठगों ने 50 लाख रुपये की मांग करते हुए लोन लेने का दबाव बनाया। शंकर सिंह यादव पंजाब नेशनल बैंक की लंका शाखा पहुंचे, जहां उनका 10 लाख रुपये का पर्सनल लोन भी पास हो गया। वे आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर करने ही वाले थे कि बैंक कर्मचारियों को उनकी घबराहट और जल्दबाजी पर शक हुआ।
बैंक के डिप्टी मैनेजर आनंद प्रकाश सिंह ने समझदारी दिखाते हुए ट्रांजैक्शन रोक दिया और उनसे बातचीत शुरू की। धीरे-धीरे पूरी सच्चाई सामने आई। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने उनकी काउंसलिंग की और परिजनों से संपर्क कराया। बेटे से बात होने पर पीड़ित को समझ आया कि वह साइबर फ्रॉड का शिकार हो रहे थे।
मामले की सूचना पर पीड़ित और बैंक कर्मचारी लंका थाने पहुंचे, जहां साइबर सेल में शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
