शाही वैभव और आस्था के संग निकली रामनगर की ऐतिहासिक रथयात्रा, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

  • वाराणसी (काशीवार्ता)। रामनगर की ऐतिहासिक दो दिवसीय रथयात्रा मेला गुरुवार शाम पारंपरिक शाही वैभव, धार्मिक आस्था और भक्तिमय उल्लास के बीच भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। सदियों पुरानी इस परंपरा के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु रामनगर की सड़कों पर उमड़ पड़े। काशी राज परिवार के अनंत नारायण सिंह ने शाम 5:45 बजे रामबाग से विधि-विधान के साथ रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया। जैसे ही रथ आगे बढ़ा, पूरा क्षेत्र “जय कन्हैया लाल की, हाथी-घोड़ा पालकी” के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

रथयात्रा के अग्रभाग में बनारस स्टेट के ध्वजवाहक और नगाड़ा वादक घुड़सवार पारंपरिक शाही अंदाज में चल रहे थे। उनके पीछे बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्ति गीत गाते और डमरू बजाते हुए रथ के साथ आगे बढ़ रहे थे। यात्रा के दौरान 36वीं वाहिनी पीएसी के जवानों का बैंड भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। बैंड की भक्तिमय धुनों ने पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। काशी राज परिवार के अनंत नारायण सिंह भी पूरे समय श्रद्धालुओं के साथ पैदल रथ के पीछे-पीछे चलते रहे और परंपरा का निर्वहन किया।

रामबाग से निकली रथयात्रा रामनगर चौक, सब्जी मंडी और किला रोड जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए शाम करीब सात बजे अयोध्या मैदान पहुंची। यहां भगवान के दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। रथ के अयोध्या मैदान पहुंचते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा।

परंपरा के अनुसार काशी राज परिवार से जुड़े ए.पी. सिंह, बलराम यादव, चौधरी पिंटू सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग भी रथयात्रा में शामिल हुए। उनके अलावा आसपास के गांवों और शहर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भी इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लिया। अयोध्या मैदान के आसपास लगे मेले में खिलौनों, मिठाइयों, पूजा सामग्री, घरेलू सामान और खान-पान की दुकानों पर देर रात तक भारी भीड़ रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने मेले का भरपूर आनंद लिया।

रामनगर की यह ऐतिहासिक रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की समृद्ध सांस्कृतिक और शाही विरासत का जीवंत प्रतीक भी है। शाही परंपरा, धार्मिक आस्था और जनसहभागिता का यह अद्भुत संगम हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। पहले दिन की भव्य शुरुआत के साथ ही दो दिवसीय मेले ने पूरे रामनगर को श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के रंग में रंग दिया। दूसरे दिन भी रथयात्रा और मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

TOP

You cannot copy content of this page