भदोही की राष्ट्रीय लोक अदालत बनी राहत का महाअभियान, 56 हजार से अधिक मामलों का हुआ निस्तारण

संवाददाता : काशीवार्ता, भदोही

भदोही, 09 मई 2026। जनपद न्यायालय परिसर सरपतहा, ज्ञानपुर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय, सामाजिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं का बड़ा मंच बनकर सामने आई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भदोही-ज्ञानपुर के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत में 56 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण कर लोगों को त्वरित राहत प्रदान की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश अखिलेश दूबे ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रत्नेशमणि त्रिपाठी, अपर जिला जज द्वितीय एवं नोडल अधिकारी पुष्पा सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव आशीष कुमार सिंह, जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी तथा मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविन्द शुक्ल सहित न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

समारोह में प्राथमिक विद्यालय घराव एवं कंपोजिट विद्यालय ज्ञानपुर देहात के बच्चों ने स्वागत गीत, सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर माहौल को भावनात्मक और भव्य बना दिया। वहीं प्राथमिक विद्यालय घराव के साढ़े चार वर्षीय छात्र अनिरुद्ध तिवारी ने 28 राज्यों की राजधानियों, राष्ट्रीय प्रतीकों और जनपद अधिकारियों के नाम सुनाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

राष्ट्रीय लोक अदालत में वर्षों पुराने पारिवारिक विवादों का भी सुखद समाधान हुआ। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रत्नेशमणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव आशीष कुमार सिंह की मध्यस्थता से दो बिछड़े दंपतियों का पुनर्मिलन कराया गया। दोनों दंपतियों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और पुनः साथ रहने का संकल्प लिया।

जनपद न्यायाधीश अखिलेश दूबे ने कहा कि लोक अदालत न्याय का सस्ता, सरल और त्वरित माध्यम है, जहां किसी की हार या जीत नहीं होती, बल्कि आपसी सहमति से स्थायी समाधान निकलता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत समाज में टूटते रिश्तों को जोड़ने और लोगों के बीच विश्वास कायम करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल कानूनी विवादों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सौहार्द, पारिवारिक एकता और आपसी विश्वास को मजबूत करने का भी प्रभावी मंच है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से लोगों का समय और धन दोनों बचते हैं।

राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 68,079 मामलों को संदर्भित किया गया, जिनमें से 56,956 मामलों का सफल निस्तारण किया गया। बैंक प्री-लिटिगेशन मामलों में 2 करोड़ 81 लाख 51 हजार 139 रुपये की वसूली हुई। एनआई एक्ट के मामलों में 5 लाख रुपये तथा बिजली बिल बकाया मामलों में 49.78 लाख रुपये की समझौता धनराशि तय की गई।

विभिन्न न्यायिक अधिकारियों द्वारा बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रत्नेशमणि त्रिपाठी द्वारा 34 वैवाहिक मामले, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निधि यादव द्वारा 494 मामले, सिविल जज सीडी तृतीय खैरूनिशा द्वारा 895 मामले, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय शशि किरन द्वारा 1008 मामले तथा सिविल जज सीडी त्वरित न्यायालय के अमित कुमार सिंह द्वारा 51 मामलों का निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त प्रशासनिक एवं राजस्व विभाग के 52,888 मामलों का भी समाधान कराया गया।

लोक अदालत की सफलता के लिए अपर जिला जज द्वितीय पुष्पा सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया था। वहीं बैंक एनपीए खातों के निस्तारण हेतु गठित विशेष लोक अदालत पीठ द्वारा 764 प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान कराया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत परिसर में “एक जनपद एक उत्पाद”, “ताना-बाना” और सोलर लाइट स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविन्द शुक्ल के निर्देशन में लगाए गए इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को रोजगार, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा संरक्षण और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

पूरे दिन न्यायालय परिसर में न्याय, विश्वास और सामाजिक सौहार्द का वातावरण बना रहा। राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि न्याय केवल कानूनी फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने और समाज में विश्वास कायम करने का भी प्रभावी माध्यम है।

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