तीन घंटे तक जाम में कराहती रही काशी! पंचकोशी चौराहे पर पुलिस के दावे ध्वस्त, एंबुलेंस और स्कूली बच्चे भी फंसे

पुलिस सहायता केंद्र में कुर्सियों पर बैठे मोबाइल चलाते दिखे ट्रैफिक पुलिसकर्मी, विदेशी पर्यटकों ने कैमरे में कैद की बदहाल यातायात व्यवस्था

वाराणसी (काशीवार्ता)। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी को जाम मुक्त बनाने के दावे सोमवार को सारनाथ के पंचकोशी चौराहे पर दम तोड़ते नजर आए। सुबह से ही चौराहे पर ऐसा भीषण जाम लगा कि करीब तीन घंटे तक सारनाथ-अशापुर-पहड़िया मार्ग पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। हालात ऐसे हो गए कि हजारों लोग सड़कों पर फंसे रहे। एंबुलेंस से लेकर स्कूली वैन और विदेशी पर्यटकों की बसें तक जाम में जूझती रहीं।

चौराहे के चारों ओर करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आशापुर से सारनाथ, पंचकोशी से पहड़िया और सारनाथ से बड़ालालपुर जाने वाले मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। ऑटो, ई-रिक्शा, बाइक, कार और बसें एक-दूसरे में उलझकर रह गईं। स्थिति इतनी खराब हो गई कि कई लोगों ने अपने वाहन सड़क पर छोड़कर पैदल ही गंतव्य तक पहुंचना बेहतर समझा।

25 मिनट तक सायरन बजाती रही एंबुलेंस, नहीं मिला रास्ता

इस जाम का सबसे ज्यादा खामियाजा मरीजों और स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक एंबुलेंस करीब 25 मिनट तक सायरन बजाती रही, लेकिन उसे निकलने का रास्ता नहीं मिल सका। वहीं, एक स्कूली वैन में सवार 12 छोटे बच्चे काफी देर तक जाम में फंसे रहे। वैन चालक ने बताया कि वह करीब एक घंटे से जाम में फंसा था और बच्चे परेशान होकर रो रहे थे। ऐसे में किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर जिम्मेदारी कौन लेगा?

जाम लगा रहा, पुलिस सहायता केंद्र में आराम फरमाते रहे जवान!

इस पूरे घटनाक्रम में यातायात पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चौराहे पर यातायात नियंत्रण के लिए तैनात दो ट्रैफिक पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभाने के बजाय चौराहे से करीब 50 मीटर दूर स्थित पुलिस सहायता केंद्र में बैठे आपस में बातचीत और मोबाइल चलाते नजर आए।

दुकानदारों और राहगीरों ने जब उन्हें जाम की स्थिति से अवगत कराया तो एक पुलिसकर्मी बाहर आया और कुछ वाहनों को हाथ से इशारा करने के बाद वापस सहायता केंद्र में जाकर बैठ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब तीन घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही, लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर यातायात सुचारु कराने की जहमत उठाता नहीं दिखा।

स्थानीय लोगों ने सुनाई परेशानी, रोजाना बनता है जाम का अड्डा

स्थानीय निवासी जितेंद्र कुमार ने बताया कि पंचकोशी चौराहे पर जाम लगना अब रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। सुबह और शाम के समय पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कोई ट्रैक्टर बीच सड़क पर खड़ा कर देता है तो ई-रिक्शा चालक सवारी भरने के चक्कर में चौराहे पर ही वाहन रोक देते हैं। इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।

वहीं, एक ऑटो चालक ने बताया कि जाम के कारण रोजाना करीब 200 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यातायात पुलिस की सक्रियता केवल चालान काटने तक ही सीमित दिखाई देती है।

विदेशी पर्यटकों के कैमरे में कैद हुई काशी की बदहाल तस्वीर

गौरतलब है कि सारनाथ अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन स्थल है। पंचकोशी परिक्रमा मार्ग के साथ सारनाथ मंदिर और संग्रहालय तक पहुंचने के लिए यह प्रमुख रास्ता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटकों का आवागमन होता है। सोमवार को विदेशी पर्यटकों की बसें भी जाम में फंसी रहीं। इस दौरान पर्यटकों ने काशी की बदहाल यातायात व्यवस्था की तस्वीरें और वीडियो अपने कैमरों में कैद किए। ऐसे हालात पर्यटन नगरी वाराणसी की छवि पर भी सवाल खड़े करते हैं।

सीसीटीवी और स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था के दावों पर उठे सवाल

इस घटना ने वाराणसी कमिश्नरेट की यातायात व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब पंचकोशी चौराहा इतना व्यस्त मार्ग है तो पीक आवर में अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती क्यों नहीं की जाती? पुलिस सहायता केंद्र जनता की मदद के लिए हैं या पुलिसकर्मियों के बैठने के लिए? शहर में लगे हजारों सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम की निगरानी व्यवस्था के बावजूद इतने लंबे समय तक जाम की स्थिति पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

स्थानीय लोगों ने पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनकी मांग है कि पंचकोशी चौराहे पर स्थायी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती, ट्रैफिक लाइट की व्यवस्था, ई-रिक्शा के लिए अलग स्टैंड और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाए। साथ ही ड्यूटी में लापरवाही के आरोपों की जांच कर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो।

अब सवाल यह है कि स्मार्ट सिटी और जाम मुक्त काशी के दावों के बीच पंचकोशी चौराहे की यह तस्वीर आखिर कब बदलेगी? क्या आम जनता को रोजाना इसी तरह जाम में जूझना पड़ेगा या कमिश्नरेट इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा?

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