बीएलडब्लू का फर्जी अधिकारी बनकर स्क्रैप टेंडर के नाम पर लाखों की ठगी

सारनाथ -(वाराणसी )- काशीवार्ता- सारनाथ थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है। बनारस लोको मोटिव वर्क बीएलडब्लू का फर्जी अधिकारी बनकर स्क्रैप वर्क टेंडर दिलाने के नाम पर । अधिवक्ता से लाखों रुपये की ठगी की गयी है। पीड़ित की तहरीर पर सारनाथ पुलिस ने दो शातिर आरोपियों के खिलाफभारतीय न्याय संहिता बीएनएस 2023की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, सारनाथ के लोहिया नगर फेज-2, हवेलिया निवासी अधिवक्ता को जाल में फंसाकर ऐंठे रुपये, पैसे वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी, पुलिस ने दो के खिलाफ शुरू की जांच अधिवक्ता विवेक चौबे का आरोप है कि भेलूपुर निवासी आरोपी आकर्ष जायसवाल ने उन्हें सुमित कुमार त्रिपाठी (निवासी भगवानपुर, लंका) से मिलवाया था। आकर्ष ने सुमित को बीएलडब्ल्यू का बड़ा अधिकारी बताया था। जालसाज सुमित कुमार त्रिपाठी ने अधिवक्ता को पूरी तरह विश्वास में लेने के लिए बीएलडब्ल्यू अधिकारी का फर्जी पहचान पत्र और स्क्रैप वर्क टेंडर से जुड़े कुटरचित (फर्जी) कागजात दिखाये। स्क्रैप का टेंडर दिलाने का झांसा देकर आरोपियों ने मोटी रकम की मांग की। झांसे में आकर पीड़ित विवेक चौबे ने आरोपियों को अलग-अलग तारीखों में बैंक ट्रांसफर, यूपीआई और एक लाख नकद के माध्यम से पैसे दिये। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो पीड़ित को शक हुआ। उन्होंने जब सीधे बीएलडब्ल्यू कार्यालय जाकर पूछताछ की, तो वहां पता चला कि सुमित कुमार त्रिपाठी नाम का कोई भी व्यक्ति बीएलडब्ल्यू में कार्यरत नहीं है और दिखाये गये सभी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं। इसके बाद जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने पहले तो टालमटोल किया। आरोप है कि बकाया रकम दो लाख सताइश हजार मांगने पर आरोपी आकर्ष जायसवाल और सुमित कुमार त्रिपाठी पीड़ित अधिवक्ता के साथ सरेआम गाली-गलौज करते हैं और पैसे देने से साफ इंकार करते हुए जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। सारनाथ पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सुमित कुमार त्रिपाठी और आकर्ष जायसवाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 319(2) (फर्जी पहचान द्वारा ठगी), 316(2) 338 (फर्जी (धोखाधड़ी), दस्तावेज बनाना), 336(3), 340 (2) (गलत तरीके से बंधक बनाना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और 351(3) (जान से मारने की धमकी) के तहत एफआईआर नंबर 0348 दर्ज किया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक मीनू सिंह को सौंपी गयी है। थाना प्रभारी पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि न्यायालय के माध्यम से प्राप्त तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस मामले से जुड़े सभी बैंक ट्रांजैक्शन और फर्जी दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल कर रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

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