पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने को बनेगा समर्पित आयोग, छह माह में देगा रिपोर्ट

उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में योगी सरकार का बड़ा फैसला
पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए होगा सामाजिक और राजनीतिक अध्ययन
पांच सदस्यीय आयोग में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे अध्यक्ष
कैबिनेट बैठक में पेश 12 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

लखनऊ, 18 मई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी गई। आयोग पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के लिए उनके सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा। कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्ताव पेश किए गए, जिन्हें स्वीकृति मिल गई।

कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में यह आयोग गठित किया जा रहा है। आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्गों की स्थिति, जनसंख्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पंचायतों में उनकी भागीदारी का विस्तृत अध्ययन करेगा तथा निकायवार आनुपातिक आरक्षण तय करने के लिए अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।

उन्होंने बताया कि और के तहत पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था पहले से लागू है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। यदि जनसंख्या के अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।

सरकार के अनुसार आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से छह माह का होगा। यह आयोग ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर ओबीसी वर्ग की भागीदारी और प्रतिनिधित्व का अध्ययन कर निकायवार आरक्षण की संस्तुति देगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी।

कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। इनमें एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग में ऐसे विशेषज्ञों और जानकार व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों का अनुभव हो।

सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ और संबंधित कानूनों के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में ओबीसी आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।

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