काशी के आसमान में दिखेगा वायु शक्ति का रोमांच! 22, 24 और 25 अक्टूबर को होगा भव्य एयर शो, PM मोदी के आने की भी संभावना

वाराणसी। भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर काशी के आसमान में देश की वायु शक्ति और शौर्य का रोमांच देखने को मिलेगा। मध्य वायु कमान की ओर से वाराणसी में ‘भारतीय वायु सेना दिवस हवाई प्रदर्शन 2026’ का आयोजन किया जाएगा। यह भव्य एयर शो 22, 24 और 25 अक्टूबर को होगा। गंगा के ऐतिहासिक तट पर होने वाला यह आयोजन काशीवासियों और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान नमो घाट पर विशिष्ट अतिथियों के लिए दर्शक दीर्घा बनाई जाएगी, जबकि आम नागरिक निर्धारित सार्वजनिक दर्शक क्षेत्रों से हवाई प्रदर्शन का आनंद ले सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है, हालांकि उनकी उपस्थिति की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है।

94 साल की गौरवशाली विरासत का प्रदर्शन

भारतीय वायु सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। आज यह देश के आकाश की सुरक्षा के साथ-साथ संयुक्त सैन्य अभियानों, आपदा राहत और मानवीय सहायता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एयर शो के जरिए वायु सेना के जवानों के साहस, बलिदान, अनुशासन और पेशेवर दक्षता की झलक काशी की जनता को देखने को मिलेगी।

काशी और मध्य वायु कमान का पुराना रिश्ता

प्रयागराज के बमरौली में मुख्यालय वाली मध्य वायु कमान वर्ष 2026 में अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर रही है। फरवरी 1966 से यह कमान बमरौली में स्थित है। युद्धक अभियानों से लेकर वायु रक्षा, सामरिक परिवहन और आपदा राहत तक मध्य वायु कमान ने देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वाराणसी का भी मध्य वायु कमान से पुराना संस्थागत संबंध है। शहर में स्थित संख्या 4 वायु सेना चयन बोर्ड जनवरी 1976 से कार्यरत है। यहां भारतीय वायु सेना में अधिकारी बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है। उड़ान शाखा के उम्मीदवारों के लिए कम्प्यूटरीकृत पायलट चयन प्रणाली के तहत परीक्षा भी आयोजित होती है। यानी कई युवाओं के लिए काशी भारतीय वायु सेना में प्रवेश की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रही है।

1965 से कारगिल तक दिखा कमान का पराक्रम

मध्य वायु कमान ने 1965 और 1971 के युद्धों में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा 1988 के ऑपरेशन कैक्टस में आगरा स्थित नंबर 44 स्क्वाड्रन के आईएल-76 विमानों ने भारतीय सैनिकों को तेजी से मालदीव पहुंचाया।

वर्ष 1999 के ऑपरेशन सफेद सागर में ग्वालियर से संचालित मिराज-2000 विमानों ने कारगिल क्षेत्र में टाइगर हिल और मुन्थो ढालो जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर सटीक हमले किए। परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों ने अभियान के दौरान जरूरी रसद सहायता भी पहुंचाई।

आपदा में भी बना मदद का भरोसा

मध्य वायु कमान की भूमिका सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रही। भुज भूकंप, हिंद महासागर सुनामी, उत्तराखंड आपदा के दौरान ऑपरेशन राहत, जम्मू-कश्मीर की बाढ़ के दौरान ऑपरेशन मेघ राहत, नेपाल भूकंप और विभिन्न राज्यों में आई बाढ़ के दौरान वायु सेना के विमानों और जवानों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाए।

गंगा किनारे आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा

अब इसी गौरवशाली विरासत को लेकर वायु सेना काशी के आसमान में अपना दमखम दिखाने जा रही है। गंगा के ऐतिहासिक तट की पृष्ठभूमि में होने वाला यह एयर शो युवाओं को भारतीय वायु सेना की कार्यप्रणाली, साहस और सेवा भावना से परिचित कराने का भी माध्यम बनेगा।

हवाई प्रदर्शन के समय, सार्वजनिक दर्शक क्षेत्रों, यातायात और पार्किंग व्यवस्था तथा सुरक्षा संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से आधिकारिक माध्यमों से जारी किए जाएंगे। प्रशासन ने नागरिकों से अधिकृत सूचनाओं का पालन करने और कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है।

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