
मुंबई/गोवा। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उन्हें लगभग सुबह 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।
नाना पाटेकर का निधन भारतीय फिल्म जगत के लिए एक बेहद भावुक कर देने वाली खबर है। अपने चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में ऐसे किरदार निभाए, जिन्हें दर्शक शायद ही कभी भूल पाएंगे। उनकी खासियत यह थी कि अभिनय में बनावटीपन नजर नहीं आता था। वह जिस किरदार को निभाते थे, उसमें पूरी तरह उतर जाते थे।
‘परिन्दा’ के अन्ना से ‘क्रांतिवीर’ के प्रताप तक
1989 की फिल्म ‘परिन्दा’ में अन्ना के किरदार ने नाना पाटेकर को अलग पहचान दिलाई। इसके बाद ‘प्रहार’ में मेजर चौहान का किरदार उनके अभिनय करियर के सबसे यादगार पात्रों में शामिल हुआ। वह इस फिल्म के लेखक और निर्देशक भी थे।
1994 में आई ‘क्रांतिवीर’ में प्रताप नारायण तिलक के किरदार ने आम आदमी के आक्रोश को पर्दे पर बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया। इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
हर किरदार में दिखी अलग पहचान
नाना पाटेकर ने ‘अग्निसाक्षी’, ‘अंगार’, ‘अपहरण’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में गंभीर और दमदार भूमिकाएं निभाईं। ‘अब तक छप्पन’ के इंस्पेक्टर साधु आगाशे का किरदार आज भी उनके प्रशंसकों के बीच खासा लोकप्रिय है।
वहीं, ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के हास्य किरदार ने साबित कर दिया कि नाना सिर्फ गंभीर भूमिकाओं के अभिनेता नहीं थे। उनकी संवाद अदायगी और चेहरे के भावों ने इस किरदार को भी यादगार बना दिया।
अभिनय से आगे सामाजिक सरोकार
नाना पाटेकर पर्दे के बाहर भी अपनी सादगी और सामाजिक सरोकारों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम किया। वह स्टारडम की चमक-दमक से दूर रहकर जमीन से जुड़े रहने के लिए भी पहचाने जाते थे।
नाना पाटेकर को पद्मश्री सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। मराठी और हिंदी दोनों सिनेमा में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
आज उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसकी आवाज, आंखों का गुस्सा, चेहरे का दर्द और अभिनय की गहराई अपने आप में एक पहचान थी।
नाना पाटेकर का जाना केवल एक अभिनेता का जाना नहीं, बल्कि अभिनय की एक पूरी शैली का विदा होना है। उनकी फिल्में और किरदार आने वाली पीढ़ियों को हमेशा उनकी याद दिलाते रहेंगे।
नाना पाटेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।
