वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी एक बार फिर सावन के पावन महीने में पूरी तरह शिवमय होने जा रही है। 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहे श्रावण मास के साथ ही श्री काशी विश्वनाथ धाम सहित शहर के सभी प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। पूरे महीने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, दर्शन-पूजन, कांवड़ यात्राएं और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहेगा। देश-विदेश से लाखों शिवभक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए काशी पहुंचेंगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। पूरे माह भगवान शिव की विशेष आराधना की जाएगी। श्रद्धालु बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल और दूध से शिवलिंग का अभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करेंगे। इस बार सावन में चार सोमवार, जबकि पांच-पांच बृहस्पतिवार और शुक्रवार पड़ रहे हैं, जिससे धार्मिक आयोजनों का महत्व और बढ़ गया है।
54 वर्षों से जारी है धार्मिक यात्राओं की परंपरा
काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति की ओर से वर्ष 1972 से सावन में विभिन्न धार्मिक यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। 2 अगस्त को केदारेश्वर अंतर्गृही प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा श्री गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर से निकलेगी, जिसमें श्रद्धालु काशी के 145 शिवालयों में जलाभिषेक और दर्शन करेंगे।
इसके बाद 9 अगस्त को द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा, 16 अगस्त को त्रिशूल यात्रा, 23 अगस्त को एकादश महारुद्र लिंग प्रदक्षिणा यात्रा तथा 24 अगस्त को बैजनाथ धाम यात्रा का आयोजन होगा। इन यात्राओं में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
जानिए कब पड़ेंगे सावन के सोमवार
- पहला सोमवार – 3 अगस्त
- दूसरा सोमवार – 10 अगस्त
- तीसरा सोमवार – 17 अगस्त
- चौथा सोमवार – 24 अगस्त
वहीं बृहस्पतिवार 30 जुलाई, 6, 13, 20 और 27 अगस्त तथा शुक्रवार 31 जुलाई, 7, 14, 21 और 28 अगस्त को पड़ेंगे।
श्रावण मेले और धार्मिक कथाओं की रहेगी धूम
श्रावण मास में काशी के विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक मेलों और कथाओं का भी विशेष आयोजन होगा। दुर्गाकुंड, सारंगनाथ, मार्कंडेय महादेव और शूलटंकेश्वर महादेव मंदिरों में पूरे सावन भर मेले लगेंगे। इसके साथ ही शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस और विष्णु पुराण कथाओं का आयोजन भी किया जाएगा। सावन के इस पावन अवसर पर पूरी काशी शिवभक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर नजर आएगी।
