
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में भव्य रूप से आयोजित हुआ। समारोह की थीम “विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला” रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “तकनीक वही सार्थक है, जो संस्कृति से जुड़ी रहे।” उन्होंने युवाओं से केवल तकनीक के उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार के सृजनकर्ता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, मातृभाषा और आधुनिक तकनीक का समन्वय है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और राष्ट्रहित में कार्य करने वाले नागरिक तैयार करना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से प्रधानमंत्री के “कैच द रेन” अभियान को जनआंदोलन बनाने, जल संरक्षण करने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, योग, दर्शन और वैज्ञानिक विरासत आज पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है।
समारोह के मुख्य अतिथि और शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीएमडी कैप्टन बी.के. त्यागी ने कहा कि काशी सदियों से शिक्षा और संस्कृति की राजधानी रही है। उन्होंने युवाओं को मर्चेंट नेवी, समुद्री परिवहन और जलमार्ग क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार और करियर की संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य संस्कारयुक्त नागरिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि डिग्री केवल सफलता का प्रमाण नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा की जिम्मेदारी भी है। वहीं उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि भारत को विश्व में अग्रणी बनाए रखने की जिम्मेदारी अब युवाओं के कंधों पर है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किए गए कौशल विकास, अनुसंधान और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की जानकारी दी।
दीक्षांत समारोह में 26 मेधावी विद्यार्थियों और दो उत्कृष्ट खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। सत्र 2025-26 में 49 पाठ्यक्रमों में 56 विद्यार्थियों ने सर्वोच्च अंक हासिल किए। इस अवसर पर स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी सहित कुल 63,183 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
भारतीय हथकरघा और प्राकृतिक रंगों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए श्री देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई. श्रीधर राव को डी.लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। चार शिक्षकों को उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान भी प्रदान किया गया।
समारोह से पहले आयोजित दीक्षोत्सव-2026 के तहत भाषण, निबंध, चित्रकला, लोकनृत्य, देशभक्ति गीत, स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता अभियान और अन्य प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने 75 बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा चंदौली की पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मानित कर आंगनबाड़ी किट भी वितरित की। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
