दशानन की जगह एक सिर वाले रावण के पुतले का होगा दहन, 70 फीट होगी ऊंचाई

वाराणसी। बरेका में दशहरे के अवसर पर हर वर्ष आयोजित होने वाले रूपक के बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। इस आयोजन को देखने के लिए वाराणसी के साथ आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार पुतलों के स्वरूप में बदलाव किया गया है। दशानन यानी दस सिर वाले रावण के स्थान पर एक सिर वाले रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है।

पुतला निर्माण में जुटे कारीगरों के अनुसार इस बार रावण का पुतला 70 फीट ऊंचा होगा, जिसमें अकेले सिर की ऊंचाई करीब 20 फीट रखी गई है। वहीं कुंभकर्ण का पुतला 65 फीट और मेघनाद का पुतला 60 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है।

तीनों पुतलों के निर्माण में करीब 150 पीस बांस, 25 लीटर पेंट, 100 किलो तांत और 500 किलो गत्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुतलों को तैयार करने में करीब 10 कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं। कारीगरों का कहना है कि दस सिर वाले रावण के पुतले को खड़ा करने में अपेक्षाकृत अधिक परेशानी होती थी। साथ ही बारिश के दौरान पुतलों के खराब होने की आशंका भी बनी रहती थी।

इसी को देखते हुए इस बार पुतलों के लिए करीब 350 मीटर सिल्क के कपड़े से परिधान तैयार किए जा रहे हैं। इन्हीं कपड़ों से तीनों पुतलों को सजाया जाएगा, ताकि उनका स्वरूप आकर्षक होने के साथ बारिश के प्रभाव से भी कुछ हद तक सुरक्षित रहे।

करीब ढाई घंटे तक चलने वाले रूपक के बाद पुतलों का दहन किया जाएगा। रूपक के निदेशक एसडी सिंह ने बताया कि इस बार दशहरे से करीब तीन दिन पहले ही रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों को मैदान में खड़ा कर दिया जाएगा। दशहरे के दिन रूपक के बाद परंपरागत रूप से तीनों पुतलों का दहन किया जाएगा।

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