हमारे जीवन को संस्कारी बनाता है प्रेमचंद का साहित्य
वाराणसी (काशीवार्ता)। साहित्य हमारे जीवन को स्वाभाविक और संस्कारी बनाता है। दूसरे शब्दों में, उसी की बदौलत मन का संस्कार होता है। यही उसका मुख्य उद्देश्य है। प्रेमचंद ने साहित्य के प्रति राजनीतिक, सामाजिक, पारिवारिक सभी को उन्होंने अपनी रचनाओं में समेटा और खास करके आम आदमी, किसान व दलित वर्ग के लोगों को वह…
