
वाराणसी। बरेका में करीब 46 वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा इस बार टूटने जा रही है। दशहरे के अवसर पर बरेका की रंगशाला में होने वाली रामलीला की जगह इस बार संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। हालांकि, विजयादशमी पर केंद्रीय खेल मैदान में होने वाला भव्य रूपक पहले की तरह आयोजित होगा।
बरेका में दशहरे से पहले रंगशाला में नारद मोह से लेकर मेघनाद वध और सुलोचना विलाप तक के प्रसंग रामलीला के माध्यम से मंचित किए जाते रहे हैं। इसके बाद केंद्रीय खेल मैदान में करीब ढाई घंटे के रूपक में राम वनगमन से लेकर रावण वध तक की कथा प्रस्तुत की जाती है। इस रूपक को देखने के लिए बरेका ही नहीं, आसपास के जिलों से भी हजारों लोग पहुंचते हैं।
बरेका कर्मचारियों के मुताबिक रंगशाला में वर्ष 1980 से अलग-अलग स्थानों के कलाकार रामलीला का मंचन करते आ रहे हैं। इससे पहले कर्मचारी स्वयं रामलीला का आयोजन करते थे। हर शाम होने वाली रामलीला बरेका कर्मियों और उनके परिवारों के लिए खास आकर्षण रही है।
इस बार 11 से 19 अक्टूबर तक शाम 7 बजे से साध्वी प्रियंका शास्त्री द्वारा संगीतमय श्रीराम कथा सुनाई जाएगी।
विजयादशमी समिति के महामंत्री अनूप सिंह वत्स ने कहा कि रामलीला और रामकथा दोनों ही प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़ी हैं। लोगों की मांग और पसंद को देखते हुए इस बार रामकथा का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थायी बदलाव नहीं है, अगले वर्ष कोई उपयुक्त कलाकार या टीम मिलने पर फिर रामलीला का आयोजन हो सकता है।
