
वाराणसी। (काशीवार्ता) शरीर नश्वर है, लेकिन नेक कार्य अमर रहता है। खासकर जब किसी के जाने के बाद उसकी आंखें किसी दूसरे की दुनिया रोशन कर दें, तो वह मानवता की ऐसी मिसाल बन जाती है, जिसे सदियों तक याद किया जाता है। इसी भावना को नमन करते हुए आईएमए भवन, वाराणसी में नेत्रदानी परिवार सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया।

समारोह में उन देवतुल्य परिवारों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोने के असहनीय दुख के बीच भी साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए नेत्रदान का महादान किया। इन परिवारों के निर्णय ने किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उजाले की नई उम्मीद पैदा की।
नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने और इस मानवीय अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका को देखते हुए काशी वार्ता समूह के प्रबंध निदेशक श्री सुशील सिंह को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने सम्मानित किया।
यह सम्मान केवल सुशील सिंह का नहीं, बल्कि ऐसी पत्रकारिता का सम्मान बताया गया, जो सामाजिक सरोकारों को आवाज देने और लोगों को प्रेरित करने का कार्य करती है।
इसके बाद श्री सुशील सिंह ने अपने कर-कमलों से नेत्रदानी परिवारों को सम्मान-पत्र प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने भावुक होकर कहा, “आप लोगों ने जो किया है, वह सिर्फ दान नहीं, महादान है। आपने सिद्ध किया है कि जाने वाला चला जाता है, लेकिन उसकी आंखें इस दुनिया को देखती रहती हैं।”
उनके शब्दों ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया। कुछ ही क्षणों में आईएमए भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। समारोह ने यह संदेश दिया कि मृत्यु जीवन का अंत हो सकती है, लेकिन नेत्रदान के जरिए इंसान किसी और की जिंदगी में हमेशा के लिए रोशनी बन सकता है।
