
वाराणसी। मिंट हाउस स्थित ऐतिहासिक Taksal Cinema Hall अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। वर्षों तक बनारस के फिल्म प्रेमियों की पहली पसंद रहे इस प्रतिष्ठित सिंगल स्क्रीन थिएटर का ध्वस्तीकरण शुरू हो गया है। इसके साथ ही शहर के उस दौर का भी अंत हो गया, जब नई फिल्म का पहला शो देखना लोगों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता था।
साल 1983 में शुरू हुआ Taksal Cinema Hall अपने समय का सबसे आधुनिक सिनेमाघर माना जाता था। करीब 1272 दर्शकों की क्षमता, अत्याधुनिक डॉल्बी स्टीरियो साउंड और शानदार सुविधाओं ने इसे पूर्वांचल के सबसे लोकप्रिय सिनेमाघरों में शामिल कर दिया था। नई फिल्मों की रिलीज पर टिकट खिड़की के बाहर लंबी कतारें लगती थीं और हाउसफुल का बोर्ड इसकी पहचान बन गया था।
अमिताभ बच्चन की ‘कुली’ और ‘शराबी’, सलमान खान की ‘मैंने प्यार किया’ तथा शाहरुख खान की ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों ने Taksal Cinema Hall के पर्दे पर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। यहां फिल्म देखना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ बिताया जाने वाला यादगार अनुभव होता था।
मल्टीप्लेक्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच Taksal Cinema Hall का आकर्षण धीरे-धीरे कम होता गया। करीब दो दशक पहले इसके दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए थे। अब इमारत के ध्वस्तीकरण के साथ बनारस की फिल्मी संस्कृति का एक अहम अध्याय भी समाप्त हो गया।
हालांकि Taksal Cinema Hall की इमारत अब नहीं रहेगी, लेकिन इसकी यादें, यहां देखी गई फिल्में और टिकट खिड़की पर लगी भीड़ की तस्वीरें हमेशा बनारस की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बनी रहेंगी।
