
वाराणसी। धर्म नगरी काशी की ऐतिहासिक रामनगर रामलीला एक बार फिर परंपरा, आस्था और भक्ति के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के ऐतिहासिक प्रसंग के बाद भोर की अलौकिक आरती में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा रामनगर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। इस दिव्य क्षण का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में रामभक्त पूरी रात जागकर सुबह होने का इंतजार करते रहे।
रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला अपनी प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट आयोजन शैली के लिए देश-दुनिया में जानी जाती है। यहां रामलीला केवल मंचन नहीं, बल्कि आस्था और लोक परंपरा का जीवंत स्वरूप है। वर्षभर श्रद्धालु उस विशेष अवसर की प्रतीक्षा करते हैं, जब प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद भोर की आरती में शामिल होकर उनका दर्शन कर सकें।
सुबह होते ही रामनगर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। भक्तों के चेहरे पर उत्साह और मन में प्रभु श्रीराम के दर्शन की लालसा साफ दिखाई दी। आरती के दौरान भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। जय श्रीराम के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और रामभक्त भावविभोर नजर आए।
इस ऐतिहासिक आयोजन ने एक बार फिर काशी की समृद्ध धार्मिक विरासत और सदियों पुरानी रामलीला परंपरा की जीवंतता को सामने रखा। आधुनिक दौर में भी रामनगर की रामलीला के प्रति लोगों की अटूट आस्था इस बात का प्रमाण है कि यहां रामकथा केवल सुनी और देखी नहीं जाती, बल्कि जनमानस के जीवन में रची-बसी है।
शिव की नगरी काशी में प्रभु श्रीराम की भक्ति का यह अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।
