सुपर्णखा की नाक काटने की लीला ने बांधा समां, चेतगंज के नक्कटैया मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब

वाराणसी। काशी की ऐतिहासिक परंपरा चेतगंज का विश्वप्रसिद्ध नक्कटैया मेला गुरुवार को भक्ति, उत्साह और उल्लास के बीच संपन्न हुआ। बारिश के बावजूद मेले में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। चेतगंज में भगवान श्रीराम के रथ के समीप सुपर्णखा की नाक काटने की लीला का सजीव मंचन किया गया। रामायण के इस प्रसंग को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

लीला के उपरांत सुपर्णखा की झांकी मलदहिया स्थित पटेल चौराहे से होते हुए चेतगंज थाने के समीप पहुंची। यहां चेतगंज रामलीला समिति की ओर से आकर्षक लाग विमानों का शुभारंभ किया गया। इस वर्ष एयर शो, बाबा नीम करौली और बच्चों पर मोबाइल के दुष्प्रभाव जैसे विषयों पर आधारित लाग विमान विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन झांकियों के माध्यम से धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश प्रस्तुत किए गए।

समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता बच्चू ने बताया कि नक्कटैया मेले की शुरुआत वर्ष 1888 में स्वर्गीय बाबा फतेह राम ने की थी। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में शुरू हुई इस परंपरा के तहत तत्कालीन जनसमस्याओं को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता था। समय के साथ यह आयोजन काशी की सांस्कृतिक पहचान बन गया। आज भी लाग विमानों के जरिए सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों को सामने लाने की परंपरा जारी है।

कार्यक्रम में महेंद्र गिरि महाराज, संजीव वर्मा, रमेश दत्त पांडेय, राजू यादव, पवन श्रीवास्तव, रजत श्रीवास्तव, तनुज पांडेय, प्रदीप कुमार कनौजिया, गौरव निगम, मनोज तिवारी सहित समिति के पदाधिकारी और अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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