
वर्षों से चल रहा था कथित अवैध पटाखा कारोबार, धमाके से आसपास के मकान भी क्षतिग्रस्त; मां-बेटे के फरार होने की चर्चा, जांच में जुटी एटीएस
वाराणसी (काशीवार्ता)। वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र के पंचक्रोशी में गुरुवार शाम करीब छह बजे हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। कथित अवैध पटाखा कारोबार के दौरान हुए धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि तीन मंजिला मकान देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गया। धमाके से आसपास के मकानों के हिस्से भी क्षतिग्रस्त हो गए। तेज आवाज के साथ चारों तरफ धूल और धुएं का गुबार छा गया। अचानक हुई इस घटना से इलाके में चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकल आए।
हादसे में तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोगों को विभिन्न अस्पतालों में उपचार कराना पड़ा। घायलों में एक 13 वर्षीय बच्ची भी शामिल है, जिसके गाल, पैर और बाल झुलस गए। घटना की सूचना मिलते ही सारनाथ पुलिस, कई थानों की फोर्स, वरिष्ठ अधिकारी, एनडीआरएफ और दमकल की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के बीच राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) भी घटनास्थल पर पहुंचा और जांच शुरू कर दी।
धमाके में ढहा पूरा मकान, आसपास के घरों में भी मची तबाही
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि राजू खान का तीन मंजिला मकान पूरी तरह ढह गया। धमाके का असर आसपास के घरों पर भी पड़ा। मकान के सामने रहने वाली चंद्रकला विश्वकर्मा के घर का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। अचानक हुए विस्फोट के बाद इलाके में धूल और धुएं का ऐसा गुबार छाया कि कुछ देर तक लोगों को आसपास कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
चंद्रकला के बेटे प्रयंक विश्वकर्मा ने बताया कि घटना के समय वह अपने घर में अकेला था। अचानक सामने स्थित मकान में जोरदार धमाका हुआ। देखते ही देखते पूरा इलाका धूल और धुएं से भर गया। बारूद की गंध फैल गई। जब कुछ देर बाद धूल छंटी तो सामने का मकान पूरी तरह ढहा हुआ था और उसके अपने घर का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था।
खेल रही थी 13 वर्षीय नैना, तभी पास आ गिरा आग का गोला
विस्फोट के दौरान एक मासूम बच्ची भी इसकी चपेट में आ गई। जानकारी के अनुसार, राजू खान के मकान से कुछ दूरी पर रहने वाले राकेश कुमार की 13 वर्षीय पुत्री नैना मोदनवाल घटना के समय खेल रही थी। तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ और आग का एक गोला उसके पास आ गिरा। इससे उसके गाल, पैर और बाल झुलस गए।
घनी आबादी के बीच कथित तौर पर पटाखे बनाने और बारूद रखने के खतरे की यह घटना गंभीर तस्वीर पेश करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विस्फोट के समय आसपास अधिक लोग मौजूद होते, तो जनहानि और भी भयावह हो सकती थी।
मंदिर जाने निकली महिला को लगा, आ गया भूकंप
घटना की प्रत्यक्षदर्शी आशा प्रजापति ने बताया कि वह मंदिर जाने के लिए घर से निकल रही थीं। इसी दौरान अचानक इतना तेज धमाका हुआ कि उन्हें लगा मानो भूकंप आ गया हो। चारों तरफ धूल छा गई और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। जब धूल हटी तो सामने राजू खान का मकान पूरी तरह ढहा हुआ दिखाई दिया।
विस्फोट के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। लोग अपने परिजनों की तलाश में जुट गए और घायलों की मदद करने लगे। मलबे और क्षतिग्रस्त मकानों के बीच राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। पुलिस और अन्य बचाव दलों ने घटनास्थल पर मोर्चा संभाला।
‘मुन्नी पटाका वाली’ के नाम से चर्चित महिला और बेटे पर सवाल
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में ‘मुन्नी पटाका वाली’ के नाम से चर्चित शहदून निशा और उसका बेटा राजू खान कथित तौर पर पटाखा बनाने और उसके कारोबार से जुड़े थे। बताया जाता है कि मकान में कई वर्षों से पटाखे बनाने का काम किया जा रहा था। गुरुवार को हुए विस्फोट में राजू खान का मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
घटना के बाद शहदून निशा और राजू खान के मौके से फरार होने की बात सामने आई है। हालांकि, उनके फरार होने और कथित कारोबार से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, शहदून निशा का परिवार करीब 25 वर्षों से पंचक्रोशी क्षेत्र में रह रहा था। राजू खान के बड़े भाई सलीम का मकान भी उसके घर के पीछे बताया जाता है। लोगों का दावा है कि दोनों भाई पटाखों के कारोबार से जुड़े थे। यह भी बताया गया कि राजू खान के पिता की मौत पहले पटाखों के कथित अवैध कारोबार के दौरान हो गई थी। इन दावों की भी जांच आवश्यक है।
वर्षों से चल रहा था कारोबार, फिर भी पुलिस को भनक नहीं लगी?
भीषण विस्फोट के बाद स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि मकान में कथित तौर पर पटाखे बनाने और रखने का काम लंबे समय से चल रहा था। इस संबंध में स्थानीय पुलिस को कई बार शिकायतें भी दी गई थीं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि घनी आबादी के बीच पटाखा निर्माण और भंडारण का काम किया जा रहा था, तो इसकी निगरानी क्यों नहीं हुई? क्या वास्तव में पुलिस को इसकी जानकारी थी? यदि शिकायतें की गई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
एटीएस ने संभाली जांच, विस्फोट के कारणों की पड़ताल शुरू
घटना की गंभीरता को देखते हुए आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) भी मौके पर पहुंचा। पुलिस और संबंधित टीमें विस्फोट के कारणों, मकान में रखी सामग्री तथा कथित पटाखा निर्माण और भंडारण की प्रकृति की जांच कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाने की जरूरत है कि पटाखे बनाने या रखने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
स्थानीय लोगों की शिकायतों और पुलिस की भूमिका की जांच भी मामले का अहम पहलू है। फिलहाल इस भीषण विस्फोट ने घनी आबादी वाले इलाकों में विस्फोटक सामग्री के कथित अवैध कारोबार और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबकी नजर जांच पर है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि तीन मंजिला मकान को मलबे में बदल देने वाले इस धमाके की असली वजह क्या थी, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और कथित अवैध कारोबार पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।
