‘जब फूल बरसे देह पर, तब मुट्ठियों में राख थी’ – कवि दिनेश कुशवाह

वाराणसी(काशीवार्ता)।दिनांक 07/10/2024 को अपराह्न 3:30 बजे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भोजपुरी अध्ययन केंद्र द्वारा ‘लेखक से मिलिए’ श्रृंखला के अंतर्गत एकल काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिंदी के प्रतिष्ठित कवि दिनेश कुशवाह मुख्य अतिथि रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाह ने किया, जिन्होंने कवि की कविता “दाम्पत्य के लिए प्रार्थना” का उल्लेख करते हुए उनके काव्य में प्रेम और जीवन के अन्य पहलुओं पर प्रकाश डाला। प्रो. प्रभाकर सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि दिनेश कुशवाह मौखिक परंपरा के विरल कवि हैं, जिनकी कविताएँ पूँजीवाद के युग में धर्म के पाखंड पर प्रहार करती हैं।

कवि दिनेश कुशवाह ने समकालीन कविता पर चर्चा करते हुए कहा कि कविता को जनोन्मुखी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने मीर के शेर का उल्लेख करते हुए कहा कि समकालीन कविताओं में कई बार अर्थ समझना कठिन हो जाता है। इसके बाद उन्होंने अपनी कविता “इसी काया में मोक्ष” और बीएचयू में लिखी कविता “अनुत्तरित” का पाठ किया। उनकी कविता “कुशवाहा राम प्रकाश” पर श्रोताओं ने खूब तालियाँ बजाईं।

कार्यक्रम का समापन प्रो. मनोज कुमार सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने दिनेश कुशवाह की कविता शैली को अनुभव से कला में बदलने का गुण बताया। अंत में, शोध छात्रा रिंकी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

TOP

You cannot copy content of this page