काशी में कांग्रेस-सपा नेताओं की बुद्धि-शुद्धि हेतु होगा वैदिक यज्ञ, राष्ट्रवादी हिन्दू शक्ति वाहिनी का बड़ा ऐलान

वाराणसी। काशी में एक बार फिर सनातन धर्म की गूंज सुनाई देने वाली है। राष्ट्रवादी हिन्दू शक्ति वाहिनी ने कांग्रेस और सपा पर सनातन विरोधी मानसिकता अपनाने तथा उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय द्वारा स्वयंभू सांसद बनने के प्रपंच को लोकतंत्र और संविधान का घोर अपमान बताया है। संगठन ने दो टूक कहा है कि ऐसे नेताओं की बुद्धि-शुद्धि के लिए वैदिक पद्धति से यज्ञ कराया जाएगा। यह अनुष्ठान 25 अगस्त 2025, सोमवार को सायं 5 बजे रामकटोरा स्थित रामजानकी मंदिर में संपन्न होगा। इसकी जानकारी आज एक पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने दी।

उन्होंने बताया कि मार्गदर्शक मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमंत महन्त वैभव गिरी महाराज (पंचदशनाम जूना अखाड़ा) के सान्निध्य में होने वाले इस यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार और हवन के साथ कांग्रेस-सपा नेताओं के नामों की प्रतीकात्मक आहुति दी जाएगी। इसके साथ ही लोकतंत्र की रक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण की शपथ भी ली जाएगी।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, अयोध्या व मथुरा सहित अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों का अभूतपूर्व विकास, धार्मिक धरोहरों का संरक्षण और सनातन संस्कृति का विश्व स्तर पर उत्थान हुआ है। इन ऐतिहासिक कार्यों से बौखलाई कांग्रेस और सपा बार-बार हिन्दू पर्व-त्योहारों पर रोक लगाने, रामभक्त कारसेवकों पर गोली चलवाने, तुष्टिकरण की राजनीति करने और हिन्दुत्व को बदनाम करने का कार्य करती रही हैं।

संगठन का कहना है कि अजय राय जैसे नेता, जो छह चुनावों में करारी हार झेल चुके हैं और जनता द्वारा पूरी तरह नकार दिए गए हैं, अब स्वयंभू सांसद बनने का दिखावा कर संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रहे हैं। ऐसे नेताओं और दलों की बुद्धि शुद्धि के लिए यह यज्ञ शांति और वैदिक परंपरा के अनुरूप किया जा रहा है।

राष्ट्रवादी हिन्दू शक्ति वाहिनी ने यह भी स्पष्ट किया कि काशी से प्रारंभ होने वाला यह बुद्धि-शुद्धि यज्ञ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत है। आगे चलकर इसे देश के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों पर आयोजित किया जाएगा, ताकि राजनीति के नाम पर सनातन धर्म और संस्कृति को कमजोर करने वाली आसुरी शक्तियों का शमन हो और भारत की लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक आत्मा और भी मजबूत बन सके।

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