आईआईटी (बीएचयू) में उभरते चुंबकीय भंडारण उपकरणों एवं सेंसर पर दो दिवसीय इंडो–इटली संयुक्त कार्यशाला का आयोजन

वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी के स्कूल ऑफ मटेरियल्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एसएमएसटी) द्वारा मंगलवार को देव एवं वर्धना गोस्वामी व्याख्यान संकुल में “उभरते चुंबकीय भंडारण उपकरण और सेंसर” विषय पर दो दिवसीय इंडो–इटली संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन में भारत और इटली के प्रमुख वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लिया और चुंबकीय सामग्रियों तथा उन्नत सेंसर प्रौद्योगिकियों में हो रहे अत्याधुनिक विकासों पर विचार-विमर्श किया।

18 नवंबर (मंगलवार) को हुए उद्घाटन सत्र की शुरुआत महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई, जिसके बाद विद्यार्थियों द्वारा बीएचयू कुलगीत प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला के संयोजक डॉ. श्रवण कुमार मिश्रा ने अतिथियों, वक्ताओं और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. मिश्रा ने संस्थान में वैज्ञानिक और तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने हेतु निदेशक प्रो. अमित पात्रा का आभार व्यक्त किया।

कार्यशाला का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए एसएमएसटी के संयोजक प्रो. चंदन उपाध्याय ने बताया कि यह आयोजन आधुनिक प्रवृत्तियों, अभिनव पद्धतियों और चुंबकीय सामग्रियों, नेक्स्ट-जनरेशन मेमोरी उपकरणों तथा उन्नत सेंसर तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर गहन चर्चा के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत और इटली के बीच यह सहयोग इन उभरते क्षेत्रों में संयुक्त शोध और ज्ञान विनिमय को गति देगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथि-विशेष प्रो. निलय कृष्ण मुखोपाध्याय, डीन (फैकल्टी अफेयर्स), आईआईटी (बीएचयू) ने कहा कि यह कार्यशाला चुंबकीय प्रौद्योगिकियों में हालिया प्रगतियों को समझने के लिए विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और युवा विद्वानों को एक साथ लाती है। स्पिन्ट्रॉनिक्स में किए गए अग्रणी योगदान वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुके हैं और डेटा भंडारण, सेंसर निर्माण तथा कंप्यूटिंग, स्वास्थ्य सेवाओं एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अंतर्विषयक क्षेत्रों से जुड़े उभरते रुझानों के अनुरूप हैं। आईआईटी (बीएचयू) के अंतरराष्ट्रीय संबंध कार्यालय से प्रो. एस. के. सिंह ने भी ऐसे संयुक्त उपक्रमों के महत्व पर बल दिया।

इटली से आए तीन प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और मुख्य अतिथियों ने इस अवसर पर विचारोत्तेजक सत्र प्रस्तुत किए:

डॉ. मीकेला क्यूपफरलिंग, जिन्होंने नेक्स्ट-जनरेशन सेंसर तकनीकों में चुंबकीय नैनोस्ट्रक्चर की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की।

डॉ. ए. मैग्नी, जिन्होंने उभरती चुंबकीय घटनाओं से प्रेरित उन्नत मेमोरी आर्किटेक्चर पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।

डॉ. विटोरियो बासो, जिन्होंने मैग्नेटो-मैकेनिकल सिस्टम्स के अत्याधुनिक विकास और उनके औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

प्रो. मुखोपाध्याय ने इतालवी वक्ताओं का सम्मान किया। कार्यक्रम में प्रो. प्रलय मैती, प्रो. चंदना रथ, प्रो. अखिलेश कुमार सिंह, प्रो. भोला नाथ पाल, प्रो. आशीष कुमार मिश्रा, प्रो. संजय सिंह, प्रो. निखिल कुमार, प्रो. रवि पंवार, प्रो. उदय शंकर, प्रो. शिवम वर्मा और प्रो. संदीप चटर्जी सहित कई गणमान्य संकाय सदस्यों ने भाग लिया।

सत्र का समापन आयोजन समिति के सचिव प्रो. गौतम आनंद द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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