
वाराणसी।
पिछले कई दिनों से गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण भय और चिंता में डूबे काशीवासियों के लिए अब राहत की खबर सामने आई है। लगातार बारिश और उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से आ रहे भारी जलप्रवाह के कारण गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था, जिससे बाढ़ का संकट गहरा गया था। लेकिन अब स्थिति में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा बुधवार, 6 अगस्त 2025 को सुबह 6 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, राजघाट गेज स्टेशन पर गंगा का जलस्तर 72.20 मीटर दर्ज किया गया है।
हालांकि यह जलस्तर अभी भी खतरे के निशान 71.262 मीटर से ऊपर बना हुआ है, लेकिन अच्छी बात यह है कि जलस्तर में अब प्रति घंटे 1 सेंटीमीटर की दर से गिरावट दर्ज की जा रही है। यह गिरावट भले ही धीमी हो, लेकिन इससे यह संकेत मिलता है कि गंगा में जलप्रवाह अब स्थिर हो रहा है और आगे चलकर स्थिति सामान्य हो सकती है।
बाढ़ की आशंका से राहत
गंगा का जलस्तर बीते सप्ताह 73 मीटर के पार पहुंच गया था, जिससे वाराणसी के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। उच्चतम बाढ़ स्तर 73.901 मीटर के बेहद करीब पहुंचने से प्रशासन और नागरिकों की चिंता बढ़ गई थी। चेतावनी स्तर 70.262 मीटर को पार करने के बाद प्रशासन ने एहतियातन कई कदम उठाए, जिनमें तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाना, नावों की व्यवस्था करना और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित करना शामिल था।
अब जबकि जलस्तर में गिरावट का रुझान सामने आया है, तो यह पूरे शहर के लिए राहत का संकेत है। खासकर वे परिवार जो गंगा किनारे बसे हैं, अब थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं।
धार्मिक गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार
वाराणसी के घाटों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विश्वप्रसिद्ध है। जलस्तर बढ़ने के कारण दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, हरिश्चंद्र घाट जैसे प्रमुख घाटों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिससे पूजा-पाठ, गंगा आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में व्यवधान आ रहा था।
अब गंगा का स्तर घटने से इन घाटों पर सामान्य गतिविधियाँ फिर से शुरू होने की उम्मीद है। स्थानीय पुजारियों और तीर्थ यात्रियों ने भी उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में जब जलस्तर और गिरेगा, तो घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ फिर से लौटेगी और गंगा आरती की भव्यता पुनः देखने को मिलेगी।
प्रशासन सतर्क, लगातार निगरानी जारी
हालांकि जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, फिर भी प्रशासन ने पूरी तरह से राहत की घोषणा नहीं की है। जिलाधिकारी के निर्देश पर राहत एवं बचाव दल अभी भी सतर्क हैं। नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस बल और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें संभावित जोखिम वाले इलाकों में लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
प्रशासन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि जलस्तर में गिरावट के बावजूद स्थिति पर पूरी सतर्कता के साथ नजर रखी जा रही है। यदि फिर से कहीं जलस्तर में बढ़ोतरी होती है, तो तुरंत कार्रवाई के लिए सभी तैयारियां पूरी हैं।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
काशी के स्थानीय निवासियों में इस खबर से खुशी और सुकून का माहौल है। ललिता घाट के पास रहने वाले संतोष शर्मा कहते हैं, “पिछले कुछ दिनों से हम डरे हुए थे कि कहीं घर में पानी न घुस जाए। अब जब सुना कि पानी घटने लगा है, तो जान में जान आई है।”
वहीं, घाटों पर रोज़ पूजा-पाठ कराने वाले एक पंडा ने बताया कि, “जब पानी बहुत ऊपर आ गया था, तब हमें घाट छोड़ना पड़ा था। अब जलस्तर घट रहा है तो उम्मीद है कि हम फिर से अपने स्थान पर लौट पाएंगे।”
गंगा का जलस्तर घटने की खबर काशीवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह संकेत देता है कि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और बाढ़ का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है। फिर भी, प्रशासन और आमजन को सतर्कता बनाए रखनी होगी, क्योंकि मानसून अभी जारी है और कहीं भी भारी बारिश की स्थिति में जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है।
गंगा में आई यह गिरावट न सिर्फ भौतिक राहत है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी बनारसवासियों को पुनः जीवन की गति देने वाली है। घाटों पर फिर से आरती की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था की लहरें गूंजने लगेंगी — यही है काशी की आत्मा, जो हर संकट के बाद और भी उज्जवल होकर उभरती है।