लाल गिरजाघर सहित चर्चों में हुई प्रार्थना, भक्ति गीतों पर झूमे अनुयाई
वाराणसी। अध्यात्म और ज्ञान की नगरी काशी में पर्वों का रंग कुछ अलग ही होता है। यहां हर त्योहार केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी खुशियां पूरे समाज में फैल जाती हैं। क्रिसमस पर्व भी इसी साझी संस्कृति और सौहार्द का जीवंत उदाहरण है।
मसीही समाज का यह प्रमुख पर्व आज काशी में पूरे हर्षोल्लास, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। छावनी स्थित ऐतिहासिक लाल गिरजाघर में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ, जहां चर्च के युवा सदस्यों और बच्चों ने मनोहारी भक्ति गीत-संगीत एवं नाट्य प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए चर्च के पादरी इकबाल मसीह ने बाइबल से प्रभु यीशु मसीह के वचनों की सारगर्भित व्याख्या की। उन्होंने कहा“परमेश्वर का वचन देहधारी हो बालक यीशु के रूप में आया ताकि मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले सके।ईर्ष्या, क्रोध और नकारात्मक भावनाएं मनुष्य को अंधकार में धकेलती हैं, जबकि प्रभु का संदेश है‘तुम ज्योति की संतान हो, इसलिए प्रकाशमान बनो।’”
*चरणी बनी आकर्षण का केंद्र
क्रिसमस पर्व के अवसर पर लाल गिरजाघर को भव्य रूप से सजाया गया था। चर्च परिसर में प्रभु यीशु के जन्म की आकर्षक झांकी (चरणी) सजाई गई, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
प्रार्थना सभा के दौरान युवाओं ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए, वहीं बच्चों सारा आईजेक, आशना, नील दयाल,जेसिका मसीह, एंड्रूज परिवार के बच्चों ने अपनी मधुर गायकी से सभी का मन मोह लिया। पादरी के आशीर्वचनों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
🤝 बधाइयां, केक वितरण और सेल्फी में कैद हुई खुशियां
प्रार्थना सभा के बाद चर्च के बाहर आगंतुक मेहमान�
