
प्रयागराज, 14 जनवरी।
मकर संक्रांति के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने अपने सैकड़ों शिष्यों और शिष्याओं के साथ अमृत स्नान किया। सुबह 7 बजे रथ रूपी वाहन पर सवार होकर संगम पहुंचे स्वामी कैलाशानंद ने गंगा स्नान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “यह अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यह साधु-संतों की वर्षों की तपस्या, साधना, प्रेम और गहरी श्रद्धा का प्रतीक है।”
उन्होंने गंगा जल को अमृत समान बताते हुए कहा, “जब साधु-संत गंगा में डुबकी लगाते हैं, अपने इष्ट महादेव, मां गंगा और सूर्यदेव का पूजन करते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि सभी देवता उनके समीप हैं। यह क्षण साधक जीवन का सबसे बड़ा पर्व है।”
लॉरेन पावेल बनीं स्वामी कैलाशानंद की शिष्या
स्वामी कैलाशानंद ने एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पावेल को आध्यात्मिक नाम “कमला” दिया है। लॉरेन सनातन धर्म की गहरी जिज्ञासु शिष्या हैं और वर्तमान में महाकुंभ के शिविर में रहकर स्वामी जी के सान्निध्य में ज्ञान अर्जित कर रही हैं। स्वामी जी ने बताया, “लॉरेन सात्विक, सरल और अहंकार रहित महिला हैं। उनके सभी सवाल सनातन धर्म से जुड़े होते हैं। उनकी जिज्ञासा को शांत करना और उन्हें संतुष्ट करना एक सुखद अनुभव है।”
हालांकि, सोमवार को लॉरेन का स्वास्थ्य थोड़ा बिगड़ गया था, लेकिन गंगा स्नान और विश्राम के बाद अब वह स्वस्थ हैं। स्वामी कैलाशानंद ने उनकी भक्ति और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा, “वे सनातन धर्म के गूढ़ रहस्यों को जानने के लिए अत्यंत उत्साहित हैं।”
महाकुंभ: सनातन धर्म का वैश्विक वैभव
स्वामी कैलाशानंद गिरी ने महाकुंभ को सनातन धर्म का सबसे बड़ा वैश्विक वैभव बताया। उन्होंने कहा, “त्रिवेणी संगम पर करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि सनातन धर्म का प्रभाव विश्व स्तर पर बढ़ रहा है। महापुरुषों के दर्शन और आशीर्वाद के लिए लोग लालायित हैं।”
उन्होंने मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि मीडिया सनातन धर्म के संदेश को पूरे विश्व में पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। यह आयोजन भारतीय संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने और सनातन धर्म की आध्यात्मिक शक्ति को उजागर करने का अद्वितीय अवसर है।
महाकुंभ का यह पावन पर्व न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में सनातन धर्म के महत्व और इसकी आध्यात्मिक शक्ति को उजागर करता है। स्वामी कैलाशानंद गिरी का संगम में अमृत स्नान और उनके शिष्यों का समर्पण इस पर्व की गरिमा को और बढ़ाता है। गंगा स्नान, श्रद्धा और साधना का यह संगम भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का जीवंत उदाहरण है।