बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन पर रोक: मंदिर प्रशासन सख्त, झांकी दर्शन ही होंगे

वाराणसी(काशीवार्ता)। काशी विश्वनाथ मंदिर में हाल ही में हुई एक घटना के बाद, मंदिर प्रशासन ने बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अब श्रद्धालु केवल झांकी दर्शन कर सकेंगे। यह निर्णय अरघे में गिरने वाले श्रद्धालुओं की घटना के बाद सुरक्षा और व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

घटना का कारण और प्रशासन की सख्ती

पिछले दिनों में मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के दौरान कुछ श्रद्धालु अरघे (जहां जल चढ़ाया जाता है) में गिर गए,जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया । इस घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षा उपायों को बढ़ाने का निर्णय लिया। प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मंदिर के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों को दोषी मानते हुए चिन्हित किया है, जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

स्पर्श दर्शन पर रोक

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, प्रशासन ने फिलहाल बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन पर रोक लगा दी है। अब श्रद्धालु केवल बाहर से ही झांकी दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय अस्थायी है और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से पुख्ता होने के बाद ही स्पर्श दर्शन की अनुमति फिर से दी जाएगी।

दोषियों की पहचान और कार्रवाई

मंदिर प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, और दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों की पहचान की जा रही है। माना जा रहा है कि जिन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही बरती है, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसलिए मंदिर के भीतर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे।

श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

इस निर्णय पर श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ श्रद्धालु जहां प्रशासन के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं और इसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही मान रहे हैं, वहीं कुछ श्रद्धालु इससे निराश भी हैं। उनके लिए स्पर्श दर्शन एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुभव होता है, और इस पर रोक लगने से उन्हें निराशा हुई है। हालांकि, अधिकांश लोग मानते हैं कि सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम उचित हैं।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि स्पर्श दर्शन पर लगी यह अस्थायी रोक श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।

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