शिक्षक ही राष्ट्र के विकास की नींव है – प्रो.(पूर्व कुलपति)दिलीप दुरेहा

सारनाथ, वाराणसी, भारतीय संस्कृति के संवाहक, शिक्षाविद्, दार्शनिक,पूर्व राष्ट्रपति, भारतरत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के मौके पर सारनाथ के विभिन्न शिक्षा संस्थानों में शिक्षक दिवस मनाया गया

इसी क्रम में केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ के आतिश सभागार में भी धूमधाम से शिक्षक दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, ग्वालियर (म.प्र)के पूर्व कुलपति प्रोफेसर दिलीप कुमार दुरेहा ने कहा कि समुचित शिक्षा मनुष्य जीवन का आधार एवं शिक्षक उस आधार के रचयिता हैं। ज्ञान का नि:स्वार्थ भाव से दान ही शिक्षक का पुनीत कर्तव्य है।यही भारत पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का मूल मंत्र भी था।
कुल सचिव डॉ सुनीता चंद्रा ने कहा कि एक योग्य शिक्षक से ही एक सभ्य देश का निर्माण होता है। किसी भी देश के विकास की नींव एक शिक्षक होता है।
अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. डब्ल्यू डी नेगी कहा कि भारतीय मिमांसा परम्परा में गुरु को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है।भारत प्राचीन काल से ही सर्वश्रेष्ठ गुरु के कारण ही विश्व गुरु रहा है। कार्यक्रम का संचालन डॉ.महेश शर्मा ने किया।इस अवसर पर डॉ हिमांशु पाण्डेय,प्रो जम्पा थुपटेन,प्रो उमेश सिंह, डॉ अनुराग त्रिपाठी, डॉ शुचिता शर्मा सहित सैकड़ों संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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