सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पीड़िता की तस्वीरें और नाम सोशल मीडिया से हटाए जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में दुष्कर्म और हत्या की शिकार महिला डॉक्टर की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया से हटाने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया, जिसमें जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर मृतक की पहचान और तस्वीरों का प्रसारण अदालत के पूर्व आदेशों का उल्लंघन है।

पीठ ने कहा कि यौन उत्पीड़न के शिकार व्यक्ति की पहचान को सार्वजनिक करना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, और इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की आजादी के बावजूद यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़ित की पहचान को उजागर नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में निपुण सक्सेना मामले में दिए गए अपने फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि किसी भी माध्यम पर पीड़ित का नाम या पहचान प्रकाशित नहीं की जा सकती।

यह आदेश वकील किनोरी घोष और अन्य द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें कहा गया था कि मृतक की तस्वीरें और नाम फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रसारित हो रहे हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी सोशल मीडिया मंचों से मृतक की तस्वीरें और वीडियो तुरंत हटाने का निर्देश दिया।

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