
वाराणसी (काशीवार्ता )। यूपी कॉलेज में छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के बाद कॉलेज परिसर का माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। घटना के विरोध में हॉस्टल के छात्र कॉलेज के मुख्य गेट पर धरना देकर न्याय की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने पूरे घटनाक्रम में कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
धरने पर बैठे छात्रों का आरोप है कि सूर्य प्रताप सिंह को कॉलेज के प्रिंसिपल धर्मेंद्र सिंह ने फोन कर कॉलेज बुलाया था। छात्रों के मुताबिक सूर्य प्रताप ने अपनी तबीयत खराब होने और टाइफाइड होने की जानकारी देते हुए सोमवार को कॉलेज आने की बात कही थी। इसके बावजूद प्रिंसिपल ने उन्हें सस्पेंड करने की चेतावनी देते हुए तत्काल कॉलेज आने के लिए कहा।
छात्रों का कहना है कि जैसे ही सूर्य प्रताप कॉलेज पहुंचे, उसी दौरान आरोपी मनजीत सिंह ने प्रिंसिपल के सामने ही उन्हें गोली मार दी। गोली लगने के बाद गंभीर रूप से घायल सूर्य प्रताप को तुरंत अस्पताल भेजने के बजाय प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों द्वारा कमरे में बंद कर दिया गया। छात्रों का आरोप है कि यदि समय रहते उन्हें इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी।
धरने में शामिल छात्रों ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बोर्ड में करीब 40 सदस्य होने के बावजूद किसी ने तत्परता नहीं दिखाई। इस मामले में प्रिंसिपल धर्मेंद्र सिंह, चीफ प्रॉक्टर संजय शाही और सदस्य पंकज सिंह की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
छात्रों का यह भी दावा है कि आरोपी मनजीत सिंह के खिलाफ वर्ष 2022 में शिवपुर थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका था, लेकिन उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कॉलेज प्रशासन, हॉस्टल के छात्रों और बाहरी छात्रों के बीच तालमेल की कमी तथा आंतरिक खींचतान भी इस घटना की एक वजह हो सकती है।
धरने पर बैठे छात्रों ने जिला प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
मृतक सूर्य प्रताप सिंह के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
गिरफ्तार आरोपी मनजीत सिंह का पुलिस एनकाउंटर किया जाए।
प्रिंसिपल धर्मेंद्र सिंह, संजय शाही और पंकज सिंह को तत्काल पद से हटाया जाए।
घटना के बाद कॉलेज परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। खुफिया विभाग भी पूरे मामले में जानकारी जुटा रहा है, जबकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच कर रहे हैं।
इसी बीच कॉलेज के पिछले गेट से कुछ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्र सूर्य प्रताप सिंह और उनके परिवार को न्याय कब तक मिलेगा और क्या प्रशासन छात्रों की मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या नहीं।
