
वाराणसी, 26 दिसंबर 2025।
संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले बनारस के समस्त बिजलीकर्मियों ने सिगरा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पावर कारपोरेशन द्वारा निजीकरण और स्मार्ट मीटर को लेकर किए गए कदम राज्य सरकार और संघर्ष समिति के बीच हुए समझौते के विपरीत हैं।
वक्ताओं ने बताया कि पावर कारपोरेशन के चेयरमैन ने 25 नवंबर 2024 को पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा ऐलान किया था, जिसके बाद से बीते 13 माह से बिजलीकर्मी आंदोलनरत हैं। अब ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा 24 दिसंबर 2025 को विधानसभा में यह स्पष्ट किया गया कि निजीकरण का कोई निर्णय नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निजीकरण का प्रस्ताव ही नहीं था, तो इसकी घोषणा क्यों की गई।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण के नाम पर ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की अवैध नियुक्ति की गई, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च हुए। इसी प्रक्रिया के तहत आरएफपी दस्तावेज तैयार कर विद्युत नियामक आयोग को भेजा गया, जिसे आयोग ने आपत्तियों के साथ लौटा दिया।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि निजीकरण के नाम पर ही विवादित निधि नारंग को निदेशक वित्त पद पर तीन बार सेवा विस्तार दिया गया, जिससे पावर कारपोरेशन को नुकसान उठाना पड़ा। साथ ही, शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजलीकर्मियों पर बीते 13 महीनों में कई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां की गईं, जिससे ऊर्जा निगमों का कार्य वातावरण बिगड़ गया।
संघर्ष समिति ने मांग की कि जब निजीकरण का कोई निर्णय नहीं है, तो पूरी निजीकरण प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए और बिजलीकर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस ली जाएं। वक्ताओं ने बताया कि ऊर्जा मंत्री के विधानसभा वक्तव्य को इकनॉमिक टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया सहित देश के प्रमुख अखबारों और पीटीआई ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
सभा को ई. मायाशंकर तिवारी, राजेन्द्र, ई. अवधेश मिश्रा, संदीप कुमार, राजेश सिंह, अजय मौर्य, जेपीएन सिंह, जमुना पाल, अशोक कुमार और मनोज जैसवाल सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
