
वाराणसी (काशीवार्ता)। धर्मनगरी काशी में बिजली विभाग की नई स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती जा रही है। बिना पर्याप्त जागरूकता अभियान और तकनीकी तैयारी के लागू की गई इस व्यवस्था से आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में लगभग 8.61 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से अब तक जीएमआर कंपनी द्वारा करीब 1.10 लाख मीटरों को प्रीपेड मोड में बदला जा चुका है। हालांकि, रामनगर और पुराना रामनगर सहित कई इलाकों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि रिचार्ज कराने के बाद भी कई-कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो रही है। इससे उपभोक्ताओं को रातभर अंधेरे में रहने की नौबत आ रही है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले न तो उन्हें सही तरीके से जानकारी दी गई और न ही तकनीकी खामियों को दूर किया गया। कई लोगों को यह भी समझ नहीं आ पा रहा है कि रिचार्ज के बाद भी बिजली क्यों नहीं आ रही है।
इस संबंध में बिजली विभाग के मुख्य अभियंता राकेश कुमार पांडेय का कहना है कि अधिकतर मामलों में समस्या ‘निगेटिव बैलेंस’ और पुराने बकाए के कारण सामने आती है। उन्होंने बताया कि केवल वर्तमान रिचार्ज कराने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि उपभोक्ताओं को पुराने एरियर का कम से कम 25 प्रतिशत जमा कर बैलेंस को पॉजिटिव करना आवश्यक होता है। तभी बिजली आपूर्ति स्वतः बहाल हो पाती है।
केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत बिजली चोरी रोकने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। हालांकि, नेटवर्क कनेक्टिविटी और सर्वर से जुड़ी समस्याओं के कारण ‘ऊजार्वान’ एप की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं से पर्याप्त बैलेंस बनाए रखने और किसी भी समस्या की स्थिति में टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर संपर्क करने की अपील की है।
