
महाकुंभ में ऐतिहासिक आयोजन
महाकुंभ का आयोजन हमेशा से तीर्थराज प्रयागराज का केंद्र रहा है, लेकिन इस बार सनातन धर्म के प्रति जो जागरूकता और एकता की लहर फैली है, वह अभूतपूर्व है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जागरूकता की विधिवत शुरुआत की है। योगी आदित्यनाथ के “बटेंगे तो कटेंगे” नारे के समर्थन में देशभर के संत खुलकर सामने आ गए हैं। संत समाज का मानना है कि योगी आदित्यनाथ सनातन धर्म के नव अंकुरण हैं।

संतों का मुख्यमंत्री योगी को समर्थन
महाकुंभ के आयोजन को लेकर दक्षिण पीठ के जगद्गुरु रामनंदाचार्य नरेंद्राचार्य और अयोध्या धाम के संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ को एक ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचाया है। संगम के तट पर बड़े-बड़े होर्डिंग और पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर सनातन धर्म के संदेश और एकता की अपील लिखी गई है। इनमें जगद्गुरु रामनंदाचार्य नरेंद्राचार्य का संदेश “सनातन सात्विक है, पर कायर नहीं” विशेष रूप से चर्चा में है।
धर्मनिष्ठ मुख्यमंत्री की छवि
श्री राम वैदेही मंदिर, अयोध्या धाम के मुख्य महंत स्वामी दिलीप दास त्यागी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी को “धर्मनिष्ठ मुख्यमंत्री” और “युगपुरुष” की संज्ञा दी है। त्यागी महाराज ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में महाकुंभ जैसे भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन पहली बार संभव हुए हैं। मुख्यमंत्री का महाकुंभ नगर में नियमित दौरा इस बात का प्रमाण है कि वे श्रद्धालुओं की सुविधाओं और उनकी सुरक्षा को लेकर कितने संवेदनशील हैं।
सनातन धर्म के प्रति नई लहर
महाकुंभ नगर में इस बार सनातन धर्म के प्रति जागरूकता की नई लहर दिखाई दे रही है। देशभर के संतों और महात्माओं ने एक स्वर में सनातन की सात्विकता और साहस का संदेश दिया है। श्रद्धालुओं के बीच इस एकता का उत्साह देखते ही बनता है। बड़े-बड़े पोस्टरों और नारों के जरिए संत समाज यह संदेश देने में सफल हुआ है कि सनातन धर्म केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का आधार भी है।
योगी का योगदान सराहनीय
महाकुंभ के आयोजन को लेकर संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका को अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद योगी आदित्यनाथ ही ऐसे नेता हैं, जिन्होंने सनातन धर्म के मूल्यों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इतना बड़ा योगदान दिया है। योगी को “सनातन के नव अंकुरण” कहकर संतों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और समर्पण की सराहना की है।
महाकुंभ का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सनातन धर्म के प्रति एकता और जागरूकता का प्रतीक भी बन गया है। संतों के विचार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका इसे ऐतिहासिक बना रही है। महाकुंभ नगर में लगे संदेश और नारों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सनातन धर्म अब न केवल सात्विक है, बल्कि साहसी भी है।