बसंत पंचमी पर अमृत स्नान का दिव्य आयोजन, साधु-संतों ने की प्रशंसा

संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम तट पर उमड़ी

प्रमुख संतों ने भव्य और दिव्य व्यवस्थाओं के लिए की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना

महाकुंभ नगर, 3 फरवरी।

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर महाकुंभ 2025 में सोमवार को अखाड़ों द्वारा भव्य अमृत स्नान का आयोजन किया गया। इस आयोजन में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम तट पर उमड़ी। देशभर से आए प्रमुख संतों ने इस आयोजन की भव्यता और दिव्यता की सराहना की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।

संतों के विचार:

भारत का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ा – आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज

उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी के इस पावन पर्व पर पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। भारत का सामाजिक सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्य पूरे विश्व के केंद्र में हैं। योग और आयुर्वेद के माध्यम से भारत की स्वीकृति और प्रतिष्ठा बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और प्लास्टिक का उपयोग न करने का संदेश दिया।

धर्म को समझने वाला ही इस परंपरा को निभा सकता है – स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज

उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती की आराधना का दिन है। सभी अखाड़े अपने-अपने समय के अनुसार पवित्र स्नान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार इस परंपरा को तभी निभा सकती है जब उसमें धर्म को समझने वाला नेतृत्व हो। योगी आदित्यनाथ जी से बेहतर कोई धर्म को नहीं समझ सकता।

सरकार और प्रशासन ने शानदार व्यवस्थाएं कीं – स्वामी बालिकानंद गिरी जी

उन्होंने कहा कि अमृत स्नान को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भावनात्मक और दिव्य तैयारी की है। शासन और प्रशासन ने इस आयोजन को सफल बनाने में पूरी तरह सहयोग किया है। समस्त अखाड़े अपने समय के अनुसार संगम में स्नान कर रहे हैं और सभी श्रद्धालु इस पावन अवसर का लाभ उठा रहे हैं।

श्रद्धालुओं से संयम रखने की अपील – महंत रविंद्र पुरी जी

महंत रविंद्र पुरी जी ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन अंतिम अमृत स्नान हो रहा है, जिसके बाद वे वाराणसी प्रस्थान करेंगे। उन्होंने बताया कि अखाड़ों को स्नान के लिए 40 मिनट का समय दिया गया है और उन्होंने श्रद्धालुओं से बिना आवश्यक कारण संगम घाट न आने की अपील की।

विश्व शांति और एकता का संदेश – स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी

उन्होंने कहा कि अमृत स्नान बहुत शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। कुंभ मेले का उद्देश्य विश्व में शांति और एकता स्थापित करना है। इस आयोजन में सभी जाति और धर्म के लोग एकत्रित होते हैं, जिससे एकता, समृद्धि और भाईचारे की भावना को बल मिलता है।

अमृत स्नान वैदिक परंपरा का हिस्सा – स्वामी ज्योतिर्मयानंद गिरी जी

उन्होंने कहा कि महाकुंभ स्वयं ही अमृत स्नान के समान है। मुगल शासन के दौरान जिसे शाही स्नान कहा जाता था, वह अब वैदिक संस्कृति में अमृत स्नान के रूप में जाना जाता है। गंगा का मात्र दर्शन ही पापों से मुक्त करने की क्षमता रखता है, और त्रिवेणी संगम में स्नान करना अत्यंत पवित्र माना जाता है।

सुरक्षा और अनुशासन का पालन करें – आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर जी

उन्होंने कहा कि इस वर्ष कुंभ में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं कि यह अभूतपूर्व दृश्य बन गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि बच्चों और बुजुर्गों को पहले स्नान कराएं और सभी एक-दूसरे का ध्यान रखें। उन्होंने युवाओं से भी सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।

प्रशासन ने उत्कृष्ट इंतजाम किए – महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज

उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी का यह स्नान पूरे विश्व के कल्याण की प्रार्थना करने का एक पावन अवसर है। इस आयोजन में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं, और प्रशासन ने उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की हैं जिससे यह आयोजन दिव्य और भव्य रूप से संपन्न हुआ।

महाकुंभ 2025 में बसंत पंचमी के अवसर पर हुए अमृत स्नान का आयोजन ऐतिहासिक रहा। संगम तट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और सभी अखाड़ों ने अपने समय के अनुसार स्नान किया। संतों और श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर को दिव्यता और भव्यता के साथ मनाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की गई, और इस आयोजन के माध्यम से विश्व को शांति, एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

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