
पीएम से नाम बहाल करने की मांग, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी
वाराणसी (काशीवार्ता)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री अजय राय ने कहा कि बनारस के पुराने प्रतिष्ठित स्टेडियम का आधुनिक निर्माण कराने के बाद प्रधानमंत्री द्वारा इसका उद्घाटन करना स्वागतयोग्य हो सकता है, लेकिन स्टेडियम से बाबू सम्पूर्णानंद का नाम हटा देना न केवल आपत्तिजनक बल्कि शर्मनाक भी है। श्री राय ने इसे काशी की गौरवशाली विरासत का अपमान करार देते हुए कहा कि इससे काशी के लाखों लोग आहत हैं और दुखी हैं। कांग्रेस इस अमर्यादित कृत्य का कड़ा विरोध करती है।
अजय राय ने कहा कि बाबू सम्पूर्णानंद जैसे विद्वान और लोकप्रिय मनीषी राजनेता का नाम किसी प्रतिष्ठान से हटाया जाना सिर्फ उनका अपमान नहीं है, बल्कि यह काशी की विद्वत आचार्य परम्परा, सत्य, त्याग, नैतिक मूल्यों और ईमानदारी की प्रेरणास्पद राजनीति का भी अपमान है। सम्पूर्णानंद का योगदान न केवल काशी बल्कि देश की आजादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण रहा है, और ऐसे व्यक्ति का नाम हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
राय ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम उस दल के लोगों द्वारा उठाया गया है, जिसने अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम का नाम बदलकर ‘नरेन्द्र मोदी स्टेडियम’ कर दिया। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि जिस सम्पूर्णानंद ने बनारस का वैदिक नामकरण ‘वाराणसी’ किया, उसी वाराणसी के नाम की आड़ लेकर सम्पूर्णानंद का नाम हटाना न केवल गलत है, बल्कि काशीवासियों के साथ एक भावनात्मक अन्याय है।
अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे इस मुद्दे का संज्ञान लें और बाबू सम्पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम का नाम पुनः बहाल करने के निर्देश दें। उन्होंने इसे एक नैतिक धर्म और काशी की भावनाओं का सम्मान करने की जरूरत बताया।
कांग्रेस ने इस कदम के विरोध को एक आंदोलन में बदलने की चेतावनी दी है। राय ने कहा कि अगर नाम बहाल नहीं किया गया तो कांग्रेस इसे लेकर व्यापक जन आंदोलन करेगी, क्योंकि यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति और इतिहास से जुड़ा हुआ विषय है।